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बच्चे का जन्म होत ही सबसे पहले उसे जो पिलाया जाता है वो है दूध। दूध को एक कंप्लीट मील कहा जाता है क्योंकि ये अपने आप में ही एक पूरा आहार है। इसलिए ही हर बच्चे को सेहतमंद बनाने के लिए मां उसे दूध पिलाती है। बड़े-बूढ़ों से लेकर डॉक्टर्स तक रोजाना दूध पीने की सलाह देते हैं। इससे हड्डियां मजबूत होती हैं और दिमाग तेज़ होता है। लेकिन इंसान के बढ़ते लालच ने अब इस दूध को भी काला कर दिया है। मिलावटखोरी का आलम ये कि दूध अब जहर बन गया है।

STF यानी स्पेशल टास्क फोर्स ने मध्य प्रदेश में मिलावट के इस नकली खेल का भंडा-फोड़ किया है। मध्य प्रदेश के कई जगहों पर STF ने छापा मारा और यहां से नकली दूध की बड़ी खेप जब्त की गई। बड़ी बात ये कि यहां तैयार दूध-मावा की सप्लाई मध्य प्रदेश के साथ तीन अन्य राज्यों में होती थी। यहां से नकली दूध और मावा छत्तीसगढ़, दिल्ली और उत्तर प्रदेश सप्लाई होता था।

कैसे बनता है मिलावटी दूध

मिलावटखोर नकली दूध बनाने के लिए कास्टिक सोडा, यूरिया, रिफाइंड ऑयल का इस्तेमाल करते हैं। नकली दूध में एंटीबायोटिक दवाओं का भी इस्तेमाल हो रहा है। इनमें अमोनियम सल्फेट और एफ्लाटॉक्सिन एम-1 तक मिलाया जाता है। दूध में मलाई आ जाए इसके लिए अरारोट डाला जाता है। नकली दूध को सफेद करने के लिए रंग का इस्तेमाल किया जाता है। दूध का खोया बनाने के लिए उसमें ब्लॉटिंग पेपर मिलाया जाता है इससे खोया ज्यादा, गाढ़ा और अच्छा दिखाई देता है।

लालच के इस खेल में हमारी और बच्चों की सेहत दांव पर लगी है> डॉक्टर्स भी नकली दूध को धीमा जहर कहते हैं, जिसे लंबे समय तक पीने वाले को सबसे ज्यादा असर गुर्दे पर पड़ता है। नकली दूध का असर लिवर पर भी पड़ता हैष फूड प्वॉइजनिंग, पेट दर्द, आंतों की सूजन हो सकती है, टाइफाइड, उल्टी, दस्त जैसी बीमारियां भी हो सकती हैं, मिलावटी दूध का असर दिमाग पर भी पड़ता है, मिलावटी दूध पीने से कैंसर तक हो सकता है।
 

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Web Title: Wherever you are not drinking Poison instead of milk!

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