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नई दिल्ली: बुधवार रात को पिछले काफी दिनों से वित्तीय संकट से जूझ रही एयरलाइन जेट एयरवेज का परिचालन अस्थायी तौर पर बंद हो गया। बैंकों के ग्रुप की तरफ से 400 करोड़ रुपये की त्वरित ऋण सहायता उपलब्ध कराने से इनकार किए जाने के बाद एयरलाइन ने यह घोषणा की। इसका सीधा असर 20 हजार कर्मचारियों के परिवार पर पड़ेगा। जेट के अस्थायी तौर पर बंद होने से यात्रियों, एयरलाइन के आपूर्तिकर्ताओं का भी करोड़ों रुपया फंस गया है। बुधवार मध्यरात्रि को अमृतसर से नई दिल्ली के लिये जेट की आखिरी उड़ान भरी गई। 

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एयरलाइन की तरफ से कहा गया कि उसकी विमान सेवायें अस्थाई तौर पर बंद रहेंगी। दिसंबर 2018 में 123 विमानों के साथ परिचालन करने वाली कंपनी ने मंगलवार को केवल पांच विमानों के साथ परिचालन किया। जेट की तरफ से बुधवार शाम जारी बयान में कहा गया कर्जदाता बैंकों की तरफ से आपात ऋण सहायता नहीं मिलने के कारण हम परिचालन को जारी रखने के लिये ईंधन और दूसरी जरूरी सेवाओं के लिये भुगतान नहीं कर पाएंगे, इसलिये, तुरंत प्रभाव से हम अपनी सभी अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों को अस्थायी रूप से निरस्त करने पर मजबूर हैं।

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जेट एयरवेज की फ्लाइट सर्विस बंद होने के बाद बैंकों के नियंत्रण में आ चुकी इस एयरलाइन की अब बोली लगाई जाएगी। इसके लिए चार बोलीदाता एतिहाद एयरवेज, राष्ट्रीय निवेश कोष एनआईआईएफ, निजी क्षेत्र के टीपीजी और इंडिगो पार्टनर हैं। नरेश गोयल खुद को पहले ही बोली की प्रक्रिया से अलग कर चुके हैं। चारों बोली दाताओं के पास अंतिम बोली सौंपने के लिए 10 मई तक का समय है। आपको बता दें अप्रैल की शुरुआत में कर्जदाता बैंकों के ग्रुप की तरफ से एसबीआई कैप ने जेट एयरवेज की 32.1 से लेकर 75 प्रतिशत तक हिस्सेदारी की बिक्री के लिये बोलियां मंगाई थी।
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Web Title: Big blow to JET Airways, temporarily closed operation

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