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चंडीगढ़: उत्तरी भारत में पानी के संकट पर चिंता का प्रगटावा करते पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने आज राज्य में पानी के वितरण के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करने के लिए प्रधानमंत्री के सहयोग की मांग की है। मुख्यमंत्री ने पानी की कम हो रही मौजूदगी के मद्देनजर पड़ोसी राज्यों के साथ विवाद का हल निकालने के लिए नहरी पानियों पर नया ट्रिब्यूनल कायम करने का न्योता दिया। मुख्यमंत्री जो स्वास्थ्य अस्वस्थ होने के कारण मीटिंग में शामिल ना हो सके, का भाषण नीति आयोग की गवर्निग कौंसिल में बांटा गया। अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने पड़ोसी राज्यों के मध्य पानी से संबंधित विवाद खत्म करने के लिए नहरी पानी पर नया ट्रिब्यूनल कायम करने का सुझाव दिया।

कैप्टन अमरेन्द्र ने भारत सरकार को प्रधानमंत्री किसान योजना के अंतर्गत वार्षिक सहायता राशि 6000 रुपए से बड़ा कर 12000 रुपए प्रति किसान करने और कृषि श्रमिकों को भी इससे जोड़ने की अपील की। उन्होंने राज्य के ‘पानी बचाओ, पैसा कमाओ ’ के प्रयास को सराहने के लिए नीति आयोग का धन्यवाद किया।मुख्यमंत्री ने पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों के उचित विकास के लिए सहायता देने का एक अन्य अहम मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह एक राष्ट्रीय जिम्मेदारी बनती है। कैप्टन ने कहा कि पिछली दो मीटिंगों में भी राज्य ने ऐसी मांग उठाते हुए सीमावर्ती इलाकों को विशेष पैकेज देने का मामला उठाया था परन्तु दु:ख की बात है कि केंद्र सरकार ने इसकी तरफ कोई स्वीकृति नहीं भरी। उन्होंने सीमा पार अपराध से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए और ज्यादा अंतर्राज्यीय सहयोग का न्योता दिया। कैप्टन ने पंजाब के साथ लगती अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर अर्धसैनिक बलों की तैनाती बढ़ाने के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों में पुलिस के आधुनिकीकरन के लिए विशेष वित्तीय सहायता की मांग की जहां इसको रक्षा की दूसरी पंक्ति के तौर पर स्थापित किया जाए।

कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने भूजल संबंधी केंद्रीय बोर्ड के अनुमानों की तरफ इशारा किया कि पंजाब में भूजल का प्रयोग चिंताजनक स्थिति तक पहुंच चुका है जोकि जमीन के निचले रिचार्ज पानी का 168 फीसद बनता है। पानी के इस संकट की तीव्रता को घटाने और इससे तुरंत निपटने के लिए राज्य सरकार विभिन्न जरूरी कदम उठा रही है जिनमें पानी के स्नेतों की संभाल, पानी के प्रयोग को घटाने की तकनीकों को अपनाने और इस उम्मीद के लिए बुनियादी ढांचे की मजबूती शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंधी राज्य सरकार द्वारा केंद्र सरकार से सहायता के लिए इसकी विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत 20,758 करोड़ रुपए की लागत वाली स्कीमें बना कर केंद्र सरकार को पेश की जा चुकी हैं। मुख्यमंत्री द्वारा भारत सरकार को चालू वित्तीय वर्ष 2019 -20 के दौरान ही इन सभी विस्तृत प्रोजैक्टों के लिए अधिक से अधिक संभव फंड मुहैया करवाने के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई है कि भारत सरकार जुलाई, 2019 में पेश होने वाले केंद्रीय बजट में इस संबंधी उचित बंदोबस्त करेगी। 

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Web Title: Policy Commission: Amarinder demand to set up a new tribunal on water

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