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जालंधर: पाकिस्तान की बार-बार गद्दारी को लेकर इस बार भारत सरकार सख्ती के मूड में है। मोस्ट नेशन का दर्जा वापस लेने के बाद भारत अब पाकिस्तान के साथ सारे व्यापारिक संबंध भी खत्म करने की लीक पर है। इसका सबसे ज्यादा असर पंजाब पर पड़ेगा। लाहौर से आने वाली समझौता एक्सप्रैस के जरिए ही सारा सामान आता और जाता था। केंद्र सरकार आने वाले कुछ दिनों में समझौता एक्सप्रैस समेत लाहौर से दिल्ली तक चलने वाली सदा-ए-सरहद बस पर ब्रेक लगा सकती है। पाकिस्तान का अलाप जपने वाले नेताओं की पहचान भी जा रही है। 

और रास्ते खोलना खतरनाक

श्री करतारपुर साहिब कारीडोर के जरिए दोनों देशों के रिश्तों पर जमी बर्फ बिघलने की तरफ बढ़ने लगी थी। पाकिस्तान के बुलावे पर केंद्र सरकार ने भी अपने डेलीगेट्स को वहां भेजा था। पाकिस्तान में जहां श्री करतारपुर साहिब कारीडोर को लेकर काम शुरु हो चुका था तो भारत सरकार ने भी जमीन एक्वायर करने के बाद यहां काम शुरु कर दिया था। ऐसे में लगने लगा था कि श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर दोनों देशों के बीच सेतु का काम कर सकता है। मगर जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में वीरवार को सुरक्षा बलों पर हुए अब तक के सबसे बड़े अटैक ने भारत सरकार को हर पहलू को दोबारा सोचने पर मजबूर कर दिया है। इसमें श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर प्रमुख है।

क्योंकि इंटैलीजैंस एजैंसियों ने पहले ही आशंका जताई थी कि इस रास्ते का पाकिस्तान आतंकियों को भारत में भेजने के लिए इस्तेमाल कर सकता है। ऐसे में अब केंद्र सरकार के कड़े रूख के बाद श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर पर संकट के बादल छा गए हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आने वाला है। ऐसे में भारत सरकार को हर कदम फूंक-फूंक कर रखना होगा। अभी तो जम्मू एंड कश्मीर में ही फिदायीन हमलों की गूंज सुनाई दे रही है। मगर इसी तरह अगर पाकिस्तान के लिए और रास्ते खोले जाते रहे तो फिर पंजाब भी एक बार फिर से आतंक के काले दौर में चला जाएगा। 

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Web Title: On the Kartarpur corridor after the Pulwama attack, cloud of crisis

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