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लुधियाना: पहाड़ों पर हो रही मूसलाधार बारिश से सतलुज दरिया उफान पर है। कई जगहों पर पानी धुस्सी बांध के किनारों को छूने लगा है तो कुछ जगहों पर पानी खेतों में भी घुस गया। इससे सतलुज दरिया के किनारे किसानों की हजारों एकड़ की खेती पानी में डूब गई और पशु भी सतलुज के तेज बहाव में बह गए। सतलुज के किनारे बसे गांव जुलाहा माजरा में पानी आने के कारण फंसे दो लोगों व कुछ बकरियों को सेना के जवानों ने रैस्क्यू कर बाहर निकाला। 

हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से सतलुज दरिया के संवेदनशील प्वाइंट्स पर सुरक्षा इंतजाम करवाए जा रहे हैं लेकिन दरिया में जल स्तर बढ़ने की वजह से धुस्सी बांध के साथ लगते गांवों के बाशिंदे सहमे हुए हैं। कुछ लोगों ने तो अपना सामान भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है। सतलुज का जल स्तर खतरे के निशान के बिल्कुल पास नजर आ रहा है। देर रात तक जलस्तर बढ़ने के इसके खतरे के निशान से ऊपर बहने की उम्मीद है। प्रशासन की तरफ से फौज के साथ-साथ एनडीआरएफ की टीमें भी जल स्तर पर निगाह रखे हुए हैं। सेना के जवानों की ओर से हैलीकॉप्टर के जरिए दरिया के आसपास इलाकों पर निगरानी रखी जा रही है।

वहीं मत्तेवाड़ा इलाके में सतलुज दरिया के किनारे गांवों की स्थिति सबसे खराब है। हालांकि अभी तक दरिया ने बांध को पार नहीं किया लेकिन कई जगहों पर दरिया का पानी बांध के बराबर तक आ पहुंचा है। गांव सेखोवाल में भी दरिया का पानी धुस्सी बांध के साथ बह रहा है। गढ़ी फाजल के महिंद्र सिंह ने बताया कि उनकी व उनके गांव के लोगों की यहां पर दरिया में 40 एकड़ के करीब जमीन है, जो पानी में डूब गई। उनका कहना है कि पशुओं के लिए बनाए कूप भी तेज बहाव में बह गए। महिंदर सिंह का कहना है कि रविवार सुबह तक पानी का जलस्तर इतना नहीं था लेकिन दोपहर तक जल स्तर एकदम बढ़ गया। वहां सिंचाई के लिए लगे उनके ईंजन भी पानी में डूब गए। 

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Web Title: water enters half a dozen villages of Ludhiana

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