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लुधियाना: सिविल अस्पताल में मरीजों की जान से खिलवाड़ के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। वीरवार को सिविल अस्पताल में एक दिल कंपकंपाने वाला मामला सामने आया है। एक महिला अपने पेट में मर चुके 5 माह के बच्चे की डिलीवरी कराने दोपहर 3 बजे सिविल अस्पताल पहुंची लेकिन रात 8 बजे तक कोई डाक्टर उसे देखने तक नहीं आया। यही नहीं 7 बजे महिला को ब्लीडिंग शुरू हो गई, इस पर भी न ता स्टाफ महिला को देखने आया और न ही डाक्टर। इसके बाद 8 बजे मरे हुए बच्चे का कुछ हिस्सा गर्भ से बाहर आ गया। इस पर वहां मौजूद महिला की सास ने उसकी डिलीवरी कराई। 

महिला रमनदीप कौर के पति सुखदीप सिंह ने बताया कि वह गांव राजगढ़ में रहते हैं। वीरवार सुबह उसकी गर्भवती पत्नी के पेट में दर्द होने लगा। इस पर उन्होंने अपनी पत्नी को गांव डांगों के सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया। वहां पर उन्हें बच्चे के कोख में ही मर जाने की जानकारी दी गई। इसके बाद उसकी पत्नी को सिविल अस्पताल लुधियाना रैफर कर दिया गया। वह 3 बजे अपनी पत्नी को सिविल अस्पताल लेकर पहुंचा। उसकी पत्नी को एडमिट तो कर लिया गया लेकिन उसका कोई उपचार शुरू नहीं किया गया। रात 8 बजे तक वह डॉक्टर का इंतजार करते रहे। 

स्टाफ नर्स से डाक्टर बारे पूछे जाने पर वह हर बार और थोड़ी देर इंतजार करने के लिए कह देती। यही नहीं 8 बजे ऐसे हालात पैदा हो गए कि उनकी मां को खुद ही अपनी बहु की डिलीवरी करानी पड़ी। सुखदीप ने कहा कि सिविल अस्पताल में उनकी पत्नी की जान से खिलवाड़ किया गया है। अभी तक डाक्टरों को उनके मृतक बच्चे के बारे में कोई जानकारी तक नहीं। जिला प्रशासन से वह उन्हें इंसाफ दिलाने की मांग करते हैं। उनकी मांग है कि उनकी पत्नी से अमानवीय व्यवहार करने वाले सिविल अस्पताल के डाक्टरों व स्टाफ नर्स के खिलाफ बनती कार्रवाई की जाए। 

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Web Title: Delivery of mother in law

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