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ऐतिहासिक सोडल मेला आज से जालंधर में सोडल मंदिर में शुरू हो गया है। इस मेले में बीस लाख से ऊपर श्रदालुयों के भाग लेने की उम्मीद है। जालंधर प्रशासन और सोडल मंदिर ट्रस्ट ने मेले में श्रदालुयो के लिए दर्शन, आराम और लंगर का पूरा प्रबंध किया गया है। इस मेले के लिए जालंधर पुलिस नेश्रदालुयो की सुरक्षा के लिए सी सी टी वी और ठीक से दर्शनों का इंतजाम  किया मेला अपनी पूरी जवानी पर था है। आज मेले में दुकाने सजी हुयी थी। लोग यहां अपने नए बच्चे जन्मे बच्चे को बैंड बाजे के साथ लेकर आते हैं और बाबा सोडल के आगे माथा टिकवाते हैं। श्रदालुयो को पूरा विश्वास है के यहां माथा टेकने से मन मांगी मुरादे पूरी होती हैं।

सडको पर बाजे गाजे के साथ नाचते हुए आ रहे लोग, सब तरफ खाने पीने, खिलौनों , चूड़ियों की दुकाने सजी हुई। झूले झूलते हुए बच्चे और बड़े , हर चेहरा खुश। ये नजारा होता है जालंधर के मशहूर  सोडल मेले का .प्राचीन सोडल मंदिर में हर साल मनाया जाने वाला मेला कल शुरू हो गया। शाम होते होते मेले में रौनक हो गई। हर तरफ श्रदालुयो की भीड़, दर्शनों के लिए लम्बी लाईने लगी हुई है। 

इस मेले का प्राचीन इतिहासः इस मंदिर में बाबा सोडल की मूर्ती सर्प रूप में स्थापित है। इसके पीछे कथा ये है के बाबा सोडल एक बालक के रूप में थे। एक दिन वो अपनी माँ से रोटी मांग रहे थे। बाबा जी की मां ने कपडे धोते हुए गुस्से में बाबा जी को रोटी मांगने पर कुछ कह दिया तो वो मंदिर में स्थित तालाब में अलोप हो गए और फिर मां के बहुत रोने पर सर्प रूप में दर्शन दिए और कहा के जो यहां मेरे दर्शन करेगा उसकी मनो कामना पूरी होगी और अनन्त चौदस वाले दिन मुझे पूजा जाए, चढ़ा बिरादरी खास कर यहां आती है और मठियां चड़ाते हैं।
 

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Web Title: Fair starts at Sodal temple in Jalandhar from today

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