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चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा का तीन दिवसीय सत्र मात्र औपचारिकता पूरी करके ही समाप्त हो गया। प्रतिदिन करीब 70 लाख रुपए खर्च करके चलने वाले इस तीन दिन के इस सत्र में 10 से 11 घंटे ही काम हो सका। पहले दिन 2 अगस्त को दिवंगत आत्मायों को श्रद्धांजलि देकर सदन की कार्रवाई स्थगित कर दी गई जबकि 5 अगस्त को सदन की कार्रवाई विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ गई। आखिरी दिन यानि 6 अगस्त को मात्र पंजाब ट्रांसपेरेंसी इन पब्लिक प्रोक्योरमेंट एवं पंजाब अर्बन ट्रांसपोर्ट फंड ही पास हो सका, इस दिन भी विपक्ष के नेता परमिंदर सिंह ढींडसा को करीब 15 मिंट तक सदन में प्रवेश करने से जबरन रोका गया।  इस दौरान सुरक्षा कर्मियों से अकाली दल के विधायकों की कहा सुनी भी हुई। विपक्षी नेताओं ने सदन की इस कार्रवाई को मात्र औपचारिकता करार देकर बाहर नारेबाजी की। 

ध्यान रहे कि सत्र की कार्रवाई के लिए प्रत्येक विधायक को 1500 रुपए डीए और 15 रुपए प्रति किलोमीटर के हिसाब से आवाजाई भत्ता मिलता है। इसके बावजूद सदन की कार्रवाई को सिर्फ शोर- शराबे की भेंट चढ़ा दिया गया। नियम 14-A के अनुसार साल में 14 बैठकें होना लाजमी है जबकि करीब 15 साल से इस नियम पर अमल नहीं किया जा रहा। कर्ज मे डूबे पंजाब राज्य के लिए इस तरह पैसे को बर्बाद करना कितना जायज है, इस सवाल का जवाब कोई बी देने के तैयार नहीं।
 

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Web Title: 70 lakh spent in one session on Punjab Legislative Assembly

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