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ब्रज मोहन सिंह 

इन पिछले सालों में हमने सुना था कि नरेन्द्र मोदी और अमित शाह लगातार कांग्रेस-मुक्त भारत बनाने के लिए उद्यमरत थे, लेकिन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को यह कहते सुना कि वह देश को कांग्रेस मुक्त नहीं, कांग्रेसवाद और परिवारवाद से मुक्ति दिलाना चाहते हैं। इससे एक बड़े वैचारिक बदलाव का संकेत मिला।  कांग्रेस ने कर्नाटक में जिस तरह से बीजेपी को कमजोर करने का काम किया, उससे यही लगा कि कांग्रेस भले ही संख्या बल में बीजेपी के मुकाबले नगण्य हो लेकिन राजनीतिक मामलों में कांग्रेस बेहतर काम करने में सक्षम है।

अतिशय आक्रामकता खुद से करीबियों को भी दूर करती है, उनको भयाक्रांत करती है। कई पार्टियाँ जो, कभी भाजपा के करीब होती थी, आज उनसे इसलिए दूर हो रही है या सशंकित है क्योंकि उनको खुद का वजूद खतरे में नज़र आता है। ऐसा मानने वाले एक नहीं कई राजनीतिक दल हैं।

भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर किसी को अपने हिसाब से राजनीति करने का हक़ है, सबको अपने-अपने हिस्से की जगह चाहिए, सबको अपने-अपने हिस्से का आसमान चाहिए।आज सही वक्त है यह समझने का कि बीजेपी सरकार देश के लिए क्या कर रही है, इसकी चार साल की क्या उपलब्धियां रही हैं। 

नरेन्द्र मोदी को देश की जनता ने इसलिए चुना क्योंकि जनता युपीए से कुछ बेहतर चाहती थी जो काम डॉक्टर मनमोहन सिंह नहीं कर सके, उसकी अपेक्षा कहीं न कहीं नरेन्द्र मोदी से की गई। इसलिए जब आपसे पुछा जाए कि आपने क्या काम किया, आप यह मत बताइए कि आपसे पहले की सरकारों ने क्या नहीं किया, कुछ क्यों नहीं किया।

आज जब कॉर्पोरेट हाउसेस में आप अपना सेल्फ रिव्यु सबमिट करते हैं आप यह नहीं बताते हैं कि आपके साथी ने क्या नहीं किया। जनता हिसाब मांगती है हर पांच साल बाद, यही रिवाज़ है लोकतंत्र का।जनता अब वादों का हिसाब मांगती है। भारत में अलग-अलग विचारधाराओं के लोग सदियों से साथ-साथ रहते हैं। यह जनता ही निर्णय करती है कि आने वाले समय में राजनीतिक व्यवस्था का असली नियामक, संवाहक और नायक कौन होगा?

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Web Title: why india will not become congress free


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