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कुछ लोग हैं जो आग से खेल रहे हैं, उन्हें हाथ जलने की फ़िक्र नहीं है। क्योकि इनका काम ही सियासत करना है। ऐसे लोग खालिस्तान और रेफेरेंडम 2020 के नाम पर सियासी रोटियाँ सेंक रहे हैं। हजारों बेगुनाह लोगों, सेना के जवानों और पंजाब पुलिस बलों की कुर्बानी के बाद पंजाब में अमन शांति स्थापित हुई लेकिन अब कुछ लोग रेफेरेंडम 2020 के नाम से पंजाब की आबो-हवा में ज़हर घोलना चाहते हैं। 

पिछले दिनों आम आदमी पार्टी के नेता और विधान सभा में विपक्ष के लीडर सुखपाल खैहरा ने इस बेकार की बहस को हवा दी। सभी अच्छी तरह जानते हैं कि हिंदुस्तान के बाहर एक ऐसी जमात बैठी हुई है जो पंजाब को खुशहाल देख नहीं सकता चाहता, इसलिए रह-रहकर आग को सुलगाया जाता है।

पंजाब विधान सभा चुनाव से पहले भी ऐसे तत्व खुलकर सामने आए थे और पंजाब की फिजा को ज़हरीला किया था। पंजाब के लोगों को तो पता ही है कि कौन हैं ऐसे लोग, जो कनाडा, जर्मनी और ब्रिटेन की धरती पर बैठकर पंजाब को अलग सूबा बनाने की मुहिम को चला रहे हैं।

पंजाब के मुख्यमन्त्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सुखपाल खैहरा पर सीधे-सीधे निशाना साधा, और इल्जाम लगाया कि वह समाज को  बांटने वाली ताकतों के साथ खड़े हैं इसलिए रेफेरेंडम 2020 का समर्थन कर रहे हैं। कैप्टन ने ट्वीट करते हुए दिल्ली के चीफ मिनिस्टर और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविन्द केजरीवाल से पुछा कि वह इस मुद्दे क्या सोचते हैं साफ़ साफ़ ज़ाहिर करें।

 पंजाब के मुख्यमंत्री कहा कि वह सुखपाल खैहरा के इस विभाजनकारी बयान के बिलकुल खिलाफ हैं क्योंकि रेफेरेंडम 2020 का एजेंडा है पंजाब को भारत से अलग करने का. कैप्टन अमरिंदर सिंह ने रेफेरेंडम 2020 की कॉपी भी नत्थी की और आम आदमी के नेताओं को हिदायत दी कि आग में घी न डालें। हालत बिगड़ता हुआ देखकर आम आदमी पार्टी ने खैहरा के बयानों से पल्ला झाड़ लिया। अकाली दल ने भी खैहरा की आलोचना करते हुए कहा कि वह देश को तोड़ने वाले ताकतों के साथ खड़े हैं। 

बाद में खैहरा ने अपनी बात रखते हुए कहा कि सिख 1984 के कत्लेआम के बाद आहत हुए हैं और उन्हें अधिकार है कि वह जिस मुल्क में हैं वहां से रेफेरेंडम 2020 की मुहिम चला सकते हैं। खैहरा ने कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि वह भारतीय संविधान का सम्मान नहीं करते, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था। खैहरा ने इस मुद्दे में कैप्टन अमरिंदर सिंह और प्रकाश सिंह बादल दोनों को ही लपेटे में ले लिया।

सबको पता है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह अपने कनाडा दौरे के समय डिक्सी गुरूद्वारे में गए, जहाँ उनके पीछे खालिस्तान जिंदाबाद का पोस्टर लगा हुआ था। बात 1992 की है जब बादल साहिब ने यूनाइटेड नेशंस के तकालीन महासचिव बुतरस घाली से मुलाकात की थी। self determination के मुद्दे को लेकर। अकाली नेता बिक्रम मजीठिया ने कहा कि वह सिख समुदाय को इन्साफ दिलाने के काम करते रहे हैं लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि भारत को तिकडे करने की किसी भी हालत में इजाज़त दी जाए।

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने मांग करते हुए कहा कि खैहरा के खिलाफ मामले दर्ज होने चाहिए। इस वक़्त पंजाब की जो माली स्थिति हैं, बेरोज़गारी है, तमाम तरह के मुद्दे हैं पंजाब के सामने, आज इस तरह के बेतुके मुद्दे उठाकर बहस को उलटी दिशा में मोड़ने का आशय क्या है? 

पंजाब ने आतंकवाद का काला दिन देखा है, जिसका संताप पंजाब के लोग अभी भी भुगत रहे हैं। आम आदमी पार्टी पंजाब में लगातार जनाधार खो रही है, ये सच्चाई है, कहीं ऐसा तो नहीं खैहरा लाइमलाइट में रहने के लिए ऐसा कर रहे हों। जो भी इसका फायदा जितना आम आदमी पार्टी को विदेशों में होगा, उससे कहीं ज्यादा जनाधार पंजाब में खिसक जाएगा। समझदारी वाली बात यह है कि आम आदमी पार्टी ने खैहरा के बयानों से किनारा कर लिया है।

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Web Title: who is poisoning again in the climate of punjab

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