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लुधियाना : डिसमिस हैड-कांस्टेबल ओमप्रकाश की उम्मीद की किरण जाग उठी है। ‘दैनिक सवेरा’ में ‘पुलिस की फर्जी कहानी का शिकार हैड कांस्टेबल मांग रहा इंसाफ’ शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद पुलिस के उच्चधिकारियों ने ओमप्रकाश की सुध ली है। लुधियाना के पुलिस कमिश्नर आर.एन. ढोके ने ओमप्रकाश को दोबारा नौकरी पर बहाल करने पर दोबारा विचार करने के लिए चंडीगढ़ डी.जी.पी. सुरेश अरोड़ा को एक पत्र लिख कर अनुरोध किया है। 
दरअसल, शिवसेना नेता अमित अरोड़ा पर हुए हमले की जांच के बाद लुधियाना पुलिस ने दावा किया था कि अमित पर कोई हमला नहीं हुआ। उसने खुद ही गनमैन और सरकारी गाड़ी लेने के लिए अपने नौकर मनी के साथ मिल कर साजिश रची थी, जबकि उस साजिश में गनमैन ओमप्रकाश भी शामिल था। इसके बाद पुलिस ने अमित अरोड़ा, नौकर मनी और ओमप्रकाश पर धोखाधड़ी, साजिश रचने और अन्य धाराओं तहत मामला दर्ज कर लिया था। ओमप्रकाश को नौकरी से डिसमिस कर दिया गया और जेल भेज दिया गया था।
 एक महीने बाद उसे जमानत मिली थी। घर पहुंचने के बाद उसके पास करने को कोई काम नहीं थी। उसने घर गुजारे के लिए सब्जी की रेहड़ी लगा ली और रात में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने लगा था लेकिन मोगा पुलिस द्वारा पकड़े गए हरदीप सिंह उर्फ शेरा, रमनदीप सिंह, जग्गी जाैहल और जिम्मी के पकड़े जाने के बाद खुलासा हुआ कि उन्होंने ही अमित को मरने के लिए गोली चलाई थी। उनका  निशाना चूक गया था, इसलिए अमित बच गया था। इस खुलासे के बाद सारी सच्चई सामने आ गई लेकिन, फिर भी उसे किसी ने पूछा तक नहीं।
बुधरवार को ‘दैनिक सवेरा’ की टीम ने डिसमिस हैड कांस्टेबल की सुध ली। टीम ओमप्रकाश के घर गई। पुलिस प्रशासन और लोगों को खबर प्रकाशित कर उसकी हालत के बारे में रू-ब-रू करवाया। खबर प्रकाशित के बाद वीरवार सुबह पुलिस कमिश्नर आर.एन. ढोके ने उसे ऑफिस बुलाया और उससे एक लिखित पत्र लेकर चंडीगढ़ अधिकारियों को भेजा है और उसकी नौकरी दोबारा बहाल करने पर विचार करने के लिए कहा है। 

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