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चंडीगढ़: पंजाब के हजारों शिक्षक और गैर शिक्षक जो विभिन्न योजनाओं के तहत कार्यरत हैं, महीनों से बिना वेतन के ही काम करने को मजबूर हैं। इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को 19 सितंबर के लिए नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया है। इस जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान पंजाब के एडवोकेट जनरल अतुल नंदा अदालत में मौजूद थे। लिहाजा चीफ जस्टिस कृष्णा मुरारी एवं जस्टिस अरुण पल्ली की खंडपीठ ने अतुल नंदा को इस विषय में एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई कर मामले की अगली सुनवाई पर हाईकोर्ट को जानकारी दिए जाने के आदेश दे दिए हैं। 

इस मामले को लेकर एडवोकेट एच.सी. अरोड़ा ने हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका में बताया है कि राज्य में हजारों शिक्षक और गैर शिक्षकों को कई महीनों से वेतन ही नहीं मिला है। हाईकोर्ट को बताया गया है कि सर्व शिक्षा अभियान के तहत कार्यरत 6339 टी.जी.टी./ई.टी.टी. शिक्षकों सहित 1400 गैर शिक्षकों, 410 इन्क्लूसिव एजुकेशन वालंटियर्स और सैकड़ों एजुकेशन प्रोवाइडर्स को पिछले वर्ष दिसंबर से, पी.आई.सी.टी.यू.एस. के कम्प्यूटर फैकल्टी के 6800 कर्मियों, 2300 पंचायत सचिवों को मार्च के बाद वेतन ही जारी नहीं किया गया है। हाईकोर्ट को बताया गया कि बी.डी.पी.ओ. कार्यालय के तहत कार्यरत 211 कम्प्यूटर शिक्षक तो पिछले 15 महीनों से वेतन का इंतजार कर रहे हैं। इनके अलावा सेवा केंद्रों के 500 से अधिक क्लर्क भी पिछले पांच महीनों से बिना वेतन के ही काम करने को मजबूर हैं। 

अरोड़ा ने दायर याचिका में एक शिक्षा प्रोवाइडर चन्ना सिंह द्वारा हाल ही में की गई आत्महत्या की जानकारी देते हुए बताया कि उसे भी पिछले पांच महीनों से वेतन नहीं मिला था, जिसके चलते उसे आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ा है। इसके साथ ही कई अन्य विभागों के कर्मी भी कई महीनों से वेतन के इंतजार में हैं। लिहाजा इन सभी का तत्काल वेतन जारी किए जाने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। हाईकोर्ट ने याचिका पर पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया है।

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Web Title: Thousands of teachers did not get salary for several months in Punjab

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