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पूरे भारत में नवरात्रों को बढ़ी धूमधाम से बनाया जाता है। भगवान राम की जीवनी को रामलीला के माध्यम से दिखाया जाता है। नो दिन तक चलने वाले इन नवरात्रों के बाद फिर आता हैं दसवां दिन जिसे बहुत ही ज्यादा उत्साह और धूमधाम के साथ सेलीब्रेट किया जाता है इस दिन मनाया जाता है दशहरा, अच्छाई की बुराई पर जीत का त्योहार पूरे देश में मनाया जाता है। यह एक संदेस देता ही की चाहे कोई कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो अगर वो बुरा है तो उसका अंत जरूर होगा और सच्चाई जीत जाएगी। इस दिन भगवान राम ने भी रावण का वध किया था। वैसे रावण बहुत ही विद्दवान था उसे चारों वेदों का ज्ञान था। बेहद शक्तिशाली और शिव भक्त भी था लेकिन बावजूद इसके रावण के अंदर के अहंकार और बुराईयों ने उसे उसके अंत तक पहुंचा दिया। इसी वजह से दशहरा हर साल खुशियां और सच्चाई लेकर आता है।

पूरे देश में दशहरा भव्य तरीके से मनाया जाता है मगर कुछ ऐसे शहर भी हैं जहां का दशहरा सिर्फ देश ही नहीं दुनिया में फेमस हैं। दशहरे के इस जश्न को देखने के लिए दुनियां भर से लोग आते हैं। और एक जगह ऐसी भी है जहां रावण को जलाया ही नहीं जाता है। आज हम आपको देश के कुछ ऐसे ही जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं जहां जाकर आप दशहरे का पूरा मजा ले सकते हैं।

1.मैसूर दशहरा

मैसूर का दशहरा, देश का सबसे बड़ा दशहरा भी काहा जा सकता है। विजय दशमी के दिन मैसूर का राज दरबार आम लोगों के लिए खोल दिया जाता है। जिससे जम्बू सवारी निकलती हैं। इस सवारी में प्राचीन काल का बना बेहद खूबसूरत हौदा निकाला जाता है जिसका नाम गजराज होता है। इस उत्सव को मैसूर में अम्बराज भी कहते हैं। इस हौदे पर चामुंडेश्वरी देवी की सवारी निकलती है।

यह जुलूस मैसूर महल से शुरू होकर बनीमन्टप पर खत्म होती है। वहां लोग बनी के पेड़ की पूजा करते हैं। माना जाता है कि पांडव अपने एक साल के गुप्तवास के दौरान अपने हथियार इस पेड़ के पीछे छुपाते थे और कोई भी युद्ध करने से पहले इस पेड़ की पूजा करते थे।

2.  बस्तर दशहरा

बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरे के इस त्योहार को मनाया तो पूरे देश में जाता है मगर इसकी मान्यता अलग-अलग शहरों में अलग-अलग है। बस्तर एक ऐसी ही जगह है जहां  75 दिनों तक दशहरा मनाया जाता है। खास बात तो ये है कि दशहरा मनाने के बाद यहां रावण को जलाते भी नहीं है।

इसका कारण ये है कि बस्तर के लोग दशहरे के दिन मां दंतेश्वरी की पूजा करते हैं। भव्य रथ तैयार करके नवरात्रि के दिन माता की चौकी निकाली जाती है। सावन के हरियाली अमावस्य से शुरू होकर दशहरा तक यह त्योहार मनाया जाता है।

3.कोटा दशहरा

उमंग और उत्साह से भरे दशहरा की धूम कोटा में भी दिखाई देती है। चम्बल के किनारे स्थित कोटा में दशहरा के दिन रावण और उसके भाई कुम्भकर्ण के साथ मेघनाद और अन्य सेनाओं का सबसे बड़ा पुतला बनवाया जाता है।

इसके बाद दशहरा के दिन उसका दहन किया जाता है। इसके अलावा नवरात्रि के 9 दिन रामलीला का मंचन किया जाता है। कुल्लु का दशहरा भव्य रूप से मनाया जाता है।

4. कुल्लू दशहरा

हिमाचल की खूबसूरत वादियों के बीच कुल्लू दशहरा काफी फेमस है। हिमाचल का दशहरा कुछ अलग और अनोखे अंदाज में मनाया जाता है। यहां इस त्योहार को दशमी की त्योहार भी कहा जाता है। इस दशहरा को रोग से मुक्ति के लिए मनाया जाता है।

पुरानी कथाओं के अनुसार कुल्लू के राजा, अयोध्या से भगवान रघुनाथ की प्रतिमा लेकर आए थे। उन्हें स्थापित करके उसकी पूजा अर्चना करने से उनके सारे रोग और कष्ट दूर हो गए थे। इसके बाद से हर साल यहां भगवान रघुराम को समर्पित दशहरा मनाया जाता है।

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Web Title: These places will have full fun of Dushehra, it lasts for 75 days Celebration

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