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सिरसाः सरकार की नाकामी कहें, किसानों की मजबूरी, हरियाणा में पराली (धान फसल के अवशेष) जल रही है और धुएं ने आबो-हवा प्रदूषित हो रही है तथा माहौल दमघोंटू बनता जा रहा है। सूत्रों के अनुसार प्रदेश के सिरसा, करनाल, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, फतेहाबाद सहित दस जिलों में लाखोंं हेक्टेयर में धान फसल की रोपी गई है। पराली जलाने से उठने वाले धुएं के कारण जहां आंखों में जलन होना आरंभ हो गया है वहीं रात के समय सड़कों पर धुएं ने वाहनों की रफ्तार भी धीमी करनी आरम्भ कर दी है।

आसमान में धुएं के गुब्बार चढ़ने से दिन के समय सूर्य की रोशनी भी मंद पड़ने लगी है। किसानों का कहना है कि अगर पराली को जलाकर खेत खाली ना किया जाए तो गेहूं की अगली फसल की बुवाई कर पाना संभव नहीं है। हरियाणा किसान सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष स्वर्ण सिंह विर्क ने बताया कि किसान पराली जलाने को विवश है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में धुआं प्रदूषण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेशों की पालना में किसानों को टारगेट किया जा रहा है जबकि दिल्ली में वायु प्रदूषण हरियाणा की पराली जलाने से नहीं बल्कि दिल्ली का ही धुआं है।

उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए किसान को इस मामले में दंडित करने की बजाय वह वैकल्पिक व्यवस्था दे। उन्होंने कहा कि हरियाणा, पंजाब में पराली कई बरसों से जलाई जा रही है पर सरकार ने इसकी वैकल्पिक व्यवस्था पर कोई गौर नहीं किया। उन्होंने कहा कि पेट्रो पदार्थों, खाद, बीज व खरपतवार नाशकों के दामों में वृद्धि से प्रदेश का किसान पहले ही आर्थिक मंदी से गुजर रहा है, अब दंडात्मक कार्यवाही कर किसान को और दबाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार के किसानोंं को बांटे कृषि उपकरण पराली के कचरे में उपयोगी साबित ना होने से किसान अंतत: पराली जलाने को विवश हैं।

दूसरी तरफ कृषि विभाग के उप-निदेशक बाबू लाल ने बताया कि एनजीटी के आदेंशों के बाद अबकी बार प्रदेश में किसानों को पराली जलाए बगैर अगली फसल की बुवाई के लिए हालांकि 50 फीसदी सब्सिडी दर पर कृषि उपकरण बांटे गए हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान से आगाह करने के मकसद से विभाग ने जिला, खंड व गांव स्तर पर जागरुकता शिविर भी आयोजित किए गए जिसका किसानों पर इसका असर देखने को मिला है।

उन्होंने बताया कि पराली जलाने से हतोत्साहित करने के लिए किसान से दो एकड़ तक 2500 रुपए, दो से पांच एकड़ तक 5000 रुपए व 5 एकड़ से अधिक क्षेत्र में पराली जलाने पर 15000 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से जुर्माना भी किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अकेले सिरसा में अब तक 223 मामले चिन्हित किए गए हैं जिनमें से 86 किसानों पर जुर्माना लगाकर दंडित किया गया है, अन्य पर कार्यवाही जारी है। 
  
अकेले सिरसा जिले में 80 हजार हेक्टेयर में धान फसल की रोपाई हुई है। वहीं प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव डीएस ढेसी ने वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से सभी उपायुक्तों, एसडीएम व कृषि अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि पराली जलाने पर रोक लगाएं संंबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर नियमानुसार जुर्माना वसूलें व कानूनी कार्यवाही करें।

ढेसी ने यह भी निर्देश दिया है कि पिछले वर्ष जिन गांवों में पराली अधिक जलाई गई थी उन गांवों को चिन्ह्त कर पहरा लगवाएं। उन्होंने अपने आदेश में कहा कि उन गावों के सरपंचों के नाम चिन्हित करें जहां पराली नहीं जलाई जा रही ऐसे सरपंचों को दो नवंबर को करनाल में आयोजित एक राज्य स्तरीय समारोह में सम्मानित किया जाएगा।

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Web Title: The smell of Parali in Haryana, knees started

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