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ब्रजमोहन सिंह

देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुख़र्जी के नागपुर दौरे के बाद अब विवादों का बाज़ार और गर्म हो गया है, सबसे बड़ा सवाल यह पुछा जा रहा है क्या कांग्रेस को  प्रणब मुखर्जी से माफ़ी मांग लेनी चाहिए।प्रणब दा द्वारा नागपुर में दिए गए भाषण को सुनने के बाद ऐसा लगा कि कांग्रेस ने प्रणब मुखर्जी के खिलाफ जिस तरह से आरोपों की झड़ी लगा दी थी, वह बेबुनियाद ही थे।

प्रणब मुख़र्जी ने अपने भाषण में देश की एकता, अखंडता, और बहुविध संस्कृति का बखान ही किया, जिसकी हर तरफ आज सराहना हो रही है। प्रणब मुखर्जी ने अपने आधे घंटे चले भाषण में जवाहरलाल नेहरु और सरदार पटेल की भी सराहना की वहीँ मुखर्जी ने हेडगेवार को भी भारत का सपूत कहा।

एक पूर्व कांग्रेसी नेता और पूर्व राष्ट्रपति द्वारा हेडगेवार की सराहना किये जाने से ही कांग्रेस को मुख्य आपत्ति है। कांग्रेस जिसकी राजनीति आरएसएस विरोध पर टिकी हुई है, उसके लिए आरएसएस के मंच पर जाकर उसके कार्यों की सराहना कांग्रेस के लिए काबिल-ए- बर्दाश्त नहीं है।

अब स्थिति यह है कि कांग्रेस अपने बयानों से न तो पलट सकती है और न ही अपने कहे हुए का बचाव ही कर सकती है। हद तो यह है कि मुखर्जी को लेकर जिन नेताओं ने पहले बयान दिए थे, उससे पार्टी ने अपना पल्ला झाड लिया है। 

कांग्रेस नेता मनीष तिवारी जो अपने कड़वे और आधारहीन बयानों के लिए पहले भी कई बार विवादों में फंस चुके हैं, ने मुखर्जी से सवालों की झड़ी लगा दी। तिवारी ने कहा कि आपने राष्ट्रवाद की बात रखने के लिए संघ कार्यालय को ही क्यों चुना?जिस संघ को लेकर आपने सत्तर, अस्सी के दशक में चेतवानी दी थी, वो अचानक अच्छा कैसे हो गया?

देश के लोग भी प्रणब दा से यही जानना चाहेंगे कि राष्ट्रवाद की बात करने के लिए उन्होंने नागपुर को क्यों चुना? क्या उनको लगता था कि दिल्ली या कहीं और यह बात की जाती तो इसकी चर्चा नहीं होती !

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Web Title: should congress seek apology from pranab mukherjee


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