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गुजरात में आज बी.आर अंबेडकर जयंती के मौके पर बवाल हो गया। यहां पर बी,आर अंबेडकर साहेब की प्रतिमा पर माल्यापर्ण करने पहुंचे बीजेपी नेताओं को लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा। यहांपर बीजेपी सांसद किरीट सोलंकी जब अंबेडकर साहिब की प्रतिमा पर माल्यापर्ण करने पहुंचे तो उस लोगों ने विरोध करना शुरु कर दिया और उन्हें बिना माला पहनाए ही वापिस आना पड़ा। बताया जा रहा है कि विरोध करने वाले लोग जिग्नेश मेवाणी के समर्थक बताए जा रहे हैं। 

Ahmedabad: Ruckus at an event on the occasion of #AmbedkarJayanti as MLA Jignesh Mevani's supporters tried to obstruct BJP MPs & members from garlanding BR Ambedkar's statue. #Gujarat pic.twitter.com/eghNs9TDfG

— ANI (@ANI) April 14, 2018

इससे पहले शुक्रवार को दलित नेता जिग्नेश मेवानी ने धमकी दी थी कि बीजेपी के किसी भी नेता को अंबेडकर कि प्रतिमा पर फूल नहीं चढ़ाने देंगे। दूसरी ओर अहमदाबाद में कड़ी सुरक्षा के बीच बड़ी तादाद में कार्यकर्ताओं के साथ बीजेपी नेता अंबेडकर की प्रतिमा पर फूल चढ़ाने पहुंचे। विरोध करने वालों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।

एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में जिग्नेश मेवानी ने शुक्रवार को ऐलान किया था कि 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती के मौके पर किसी भी भाजपा नेता को बाबा साहेब अंबेडकर के स्टेच्यू को हाथ नहीं लगाने दिया जाए। मेवानी ने कहा था कि नरेंद्र मोदी की राजनीति को देखें, तो लगता है कि जुबान पर बाबा साहेब अंबेडकर का नाम है, लेकिन दिल में उनके मनु छुपा बैठा है। मेवानी ने कहा कि अब तक 11 दलित मारे गए हैं, लेकिन उन्होंने एक शब्द नहीं बोला। ऊना पीड़ितों के मामले में भी उन्होंने एक शब्द नहीं बोला। गुजरात के वडगाम से सांसद मेवानी ने कहा कि ये लोग संविधान को बदलना चाहते हैं, उनके नेता अनंत कुमार हेगड़े साफ तौर पर कह चुके हैं कि संविधान को बदलने के लिए हम यहां हैं। ये लोग एससी-एसटी एक्ट को खत्म करना चाहते हैं।

बता दें, 22 जनवरी को ही जिग्नेश मेवाणी ने कलेक्टर को और उससे दो दिन पहले गुजरात के चीफ सेक्रेटरी को ज्ञापन दिया था। इसमें ये बताया गया था कि 1984 में सरकार के जरिए जो जमीन किसानों को दी गई थी, उस जमीन का कब्जा अभी तक किसानों को नहीं मिला है। किसानों की जमीन को लेकर जो मांग चली आ रही है, वो उन्हें दे दी जाए, वरना वो सामख्याली हाईवे जाम करेंगे।1984 में सरकार के जरिए दलित और कोली समाज को जमीन दी गई थी, लेकिन कानूनी तौर पर उन्हें जमीन का कब्जा नहीं सौंपा जा रहा था। सरकारी कागजों के मुताबिक दलित समाज को 3,300 एकड़ जमीन सौंपी जा चुकी है, जबकि कोली समाज को 2400 एकड़ जमीन सौंपी गई है। लेकिन यह जमीन दलितों और कोली समाज के लोगों को नहीं मिली।

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Web Title: protest on ambedkar jayanti

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