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ब्रजमोहन सिंह

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर राहुल गांधी लगातार हमले करते रहते हैं लेकिन इन कथित हमलों  के बावजूद भी  संघ ने अपने एक विशेष कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को को आमंत्रित करने पर फैसला लिया है। संघ का यह फैसला जोखिम भरा है लेकिन उससे भी ज्यादा जोखिम भरा होगा राहुल गांधी का फैसला। 

राहुल गांधी या तो संघ के कार्यक्रम में जायेंगे, अगर गए तो राहुल अपनी बात वहां अच्छी तरह से रख सकते हैं। उनका सम्मान और स्वागत मोहन भागवत खुद करेंगे। लेकिन राहुल क्या इस वैचारिक दीवार को लांघ कर संघ के बैनर तले खड़े होंगे?

इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि आरएसएस अपने 'फ्यूचर ऑफ इंडिया' नामक कार्यक्रम के लिए राहुल गांधी को एक निमंत्रण पत्र भेज सकता है। 
आरएसएस के प्रवक्ता अरुण कुमार के अनुसार संगठन 17-19 सितंबर से सम्मेलन के लिए सभी राजनीतिक दलों के महत्वपूर्ण नेताओं को आमंत्रित कर रहा है, जिसमें राहुल गाँधी का भी नाम भी शामिल रहेगा। 

पिछले कुछ दिनों में राहुल गाँधी ने संघ पर सीधा सीधा हमला किया है। राहुल गांधी ने आरएसएस की तुलना सुन्नी ईस्लामिक संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड के साथ की। राहुल ने कहा था कि  "दोनों संगठनों की स्थापना 1 9 20 के दशक में हुई थी। दोनों संगठन के काम करने का तरीका एक जैसा है, जो सबसे पहले स्थापित सरकारी संगठनों को अपने कब्ज़े में लेता है और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करता है। 

इस टिप्पणी के बाद बीजेपी ने राहुल गाँधी की कड़ी आलोचना की, जिसमें उन्होंने कहा था की आरएसएस भारत और भारतीयता दोनों को ही खत्म करनी कोशिश कर रहा है। राहुल गाँधी की तरफ से बाद में कहा गया कि उनके विचारों को गलत तरीके से प्रचारित किया गया। राहुल गाँधी क्या संघ के आमंत्रण को स्वीकार करेंगे? यह वाकई काफी चुनौतीपूर्ण कदम होगा राहुल गांधी के लिए। इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने संघ का आमंत्रण स्वीकार कर नागपुर भी गए थे। मुखर्जी के इस कदम की कांग्रेस के हलकों में खूब आलोचना हुई थी. अगर राहुल गाँधी संघ के कार्यक्रम में जाते हैं तो वह बहुत बड़ा राजनीतिक जोखिम मोल लेंगे। 
 

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Web Title: Masterstroke of Sangh - Will Rahul Gandhi Stand Under RSS Banner

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