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अधिकतर लोग कार्टून को दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और मासिक पत्र-पत्रिकाओं में छपने वाले उन व्यंग्य-चित्रों के रूप में जानते हैं जो अपनी बात तो बहुत तीखे तल्ख अंदाज में कहते हैं और साथ ही उन्हें देखकर हंसी भी आती है। दरअसल अभिव्यक्ति का यह तरीका काफी पुराना है। कहा जाता है कि एक चित्र हजार शब्दों की कमी पूरी कर देता है। अगर इसी पैमाने पर कहना हो तो कह सकते हैं कि एक कार्टून सैकड़ों चित्रों की कमी पूरी कर देता है यानी कार्टून अभिव्यक्ति का सबसे तीखा ही नहीं बल्कि अपार कल्पना से भरा माध्यम भी होता है। यही वजह है कि आज मीडिया का ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहां कार्टून अभिव्यक्ति का जरिया न बन गया हो।

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कुछ साल पहले विजुअल मीडिया में कार्टून के लिए जगह बनाना असंभव लग रहा था लेकिन आज स्थिति यह हो गई है कि कोई भी चैनल इसके बिना अधूरा है। यही कारण है कि आज एक कार्टूनिस्ट के लिए मीडिया और मीडिया तथा एंटरटेनमैंट के कई दूसरे क्षेत्रों में भरपूर अवसर पैदा हो गए हैं। एक कार्टूनिस्ट की टेढ़ी-मेढ़ी रेखाओं और उनसे बनने वाले मुंह चिढ़ाते-मुस्कुराते चित्रों की सिर्फ  मीडिया क्षेत्र में ही मांग नहीं बढ़ी अपितु दूसरे कई कलात्मक क्षेत्रों में भी खूब बढ़ी है। इसके महत्व का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि पहले जहां कार्टूनिंग को फाइन आर्ट्स में सिर्फ एक चैप्टर के रूप में पढ़ाया जाता था वहीं आज कार्टूनिंग पढ़ाने के लिए विशेष संस्थान खुल चुके हैं।

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हालांकि काटूनिंग कोई ऐसा कौशल नहीं है जिसे पढ़कर या सीखकर हासिल किया जा सके। हां, इसे पढ़ने और सीखने में निखार और आ जाता है लेकिन कार्टूनिंग एक तरह से जन्मजात स्वभाव में होती है।
वही व्यक्ति कार्टूनिस्ट बन सकता है जो चीजों, घटनाओं, स्थितियों, मामलों और संदर्भों को बहुत बारीकी से और अपने निजी नजरिये के साथ देखता हो। यही नहीं अपने नजरिए से वह इन चीजों पर टिप्पणी भी कर सकने की क्षमता रखता हो। 

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आर के लक्ष्मण, राजेन्द्र पुरी, राजेन्द्र धोड़पकर, काक, सुधीर तैलंग, इरफान, अजीतो मेनन जैसे कार्टूनिस्टों को आज भला कौन नहीं जानता। इनके सम-सामयिक विषयों पर बनाए गए कार्टून किसी विशेषज्ञ की लिखी गई विशेषज्ञीय टिप्पणी से कम महत्वपूर्ण नहीं होते। कुल मिलाकर कहने की बात यह है कि आज की तारीख में एक कार्टूनिस्ट के लिए करियर के शानदार अवसर उपलब्ध हैं। जिस तरह पत्रकारों में अलग-अलग पद और उनके मुताबिक वेतनमान हैं उसी तरह कार्टूनिस्ट के लिए भी जूनियर, सीनियर और आर्ट डायरैक्टर जैसे पद हैं और उन्हीं के अनुसार 8-9 हजार रुपए मासिक से लेकर 70-75 हजार रुपए मासिक तक का वेतन इन्हें मिलता है। कार्टूनिस्ट बनने के लिए भारी-भरकम डिग्रियों की भी जरूरत नहीं पड़ती। 10+2 करने के बाद किसी भी फाइन आर्ट संस्थान में दाखिला मिल जाता है जहां पर तमाम ड्राइंग रिलेटेड कोर्सेस उपलब्ध होते हैं। उन्हीं के साथ कार्टूनिंग का विषय भी मौजूद होता है। 

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प्रशिक्षण संस्थान 
*कालेज आॅफ फाइन आर्ट, तिलक मार्ग, नई दिल्ली
*इंस्टीच्यूट आॅफ फाइन आर्ट एंड डिजाइन, कालेज रोड, चेन्नई।
*फैकल्टी आॅफ फाइन आर्ट्स, बड़ौदा यूनिवर्सिटी, बड़ौदा।
*कला भवन विश्वभारती, शांति निकेतन, पश्चिमी बंगाल।
*जे.जे. स्कूल आॅफ एप्लाइड आर्ट, डॉ. डी.एन. रोड, मुंबई।
*सोफिया कॉलेज, मुंबई।
*बी.के. सोमानी पॉलीटैक्नीक, मुंबई। 

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Web Title: Make a career as a cartoon artist, 12th can earn even lakhs of rupees every month

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