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नई दिल्लीः अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरु हुई और कोर्ट में दलीलों के बाद फिर से सुनवाई को टाल दिया गया और 14 मार्च को अगली सुनवाई की तारीख रखी गई। अयोध्या मामले में सुनवाई के दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कहा कि अभी उन्हें दस्तावेजों के अनुवाद के लिए कुछ और समय चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई 14 मार्च को होगी। कोर्ट ने 7 मार्च तक सभी दस्तावेजों को जमा करने के लिए कहा है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल मौजूद नहीं रहे। गुरुवार को सुनवाई के दौरान रोजाना सुनवाई के ऊपर कोई चर्चा नहीं हुई। 

मुस्लिम पक्ष की तरफ से एजाज़ मकबूल की दलील थी कि उन्हें कई कागज़ात अब तक नहीं मिले हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि मामले से जुड़ी 42 किताबों का अंग्रेजी अनुवाद 2 हफ्ते में जमा करवाया जाए और सभी पक्षों को इन्हें दिया जाए।

चीफ जस्टिस ने कहा- मुख्य पक्षों के अलावा अब तक जिन लोगों ने अर्ज़ी दाखिल की है, उनकी सुनवाई होगी। केस शुरू होने के बाद किसी नई अर्ज़ी को स्वीकार नहीं किया जाएगा। यूपी सरकार की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मामले में कुल 504 सबूत और 87 गवाह हैं। 

जानिए कोर्ट में सुनवाई के दौरान क्या हुआ 

  • चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा- 7 मार्च तक सभी दस्तावेज पूरे किए जाएं। इसके साथ ही उन्होने ंकहा कि राम मंदिर विवाद पर अगली सुनवाई 14 मार्च को होगी. वो भी सभी  दस्तावेजों के साथ 
  • कोर्ट ने कहा- किताबों का अंग्रेज़ी अनुवाद 2 हफ्ते में जमा करवाया जाए। सभी पक्षों को इन्हें दिया जाए।
  • चीफ जस्टिस ने कहा- मुख्य पक्षों के अलावा अब तक जिन लोगों ने अर्ज़ी दाखिल की है, उनकी सुनवाई होगी. केस शुरू होने के बाद किसी नई अर्ज़ी को स्वीकार नहीं किया जाएगा.
  •  यूपी सरकार की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा- मामले में कुल 504 सबूत और 87 गवाह हैं
  •  कोर्ट ने कहा- जिन किताबों के अंश सुप्रीम कोर्ट में पढ़े जाने हैं, उनका अंग्रेज़ी अनुवाद जमा करवाएं
  • मुस्लिम पक्ष की तरफ से दलील, कई कागज़ात अब भी हमें नहीं मिले- एजाज़ मकबूल की दलील
  • चीफ जस्टिस ने कहा, कृपया सभी पक्ष इस मामले को भूमि विवाद की तरह ही देखें।
  • मुख्य पक्षों के अलावा जिन लोगों ने भी दलील रखने की अर्जी दी है, उन्हें बाद में सुना जाएगा. पहले मुख्य पक्षों की सुनवाई होगी।
  • अशोक भूषण, अब्दुल नजीर और दीपक मिश्रा की बेंच मामले की सुनवाई कर रही है।

इस पीठ ने गत वर्ष 5 दिसम्बर को स्पष्ट किया था कि वह 8 फरवरी (आज) से इन याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई शुरु करेगी। वरिष्ठ अधिवक्ताओं- कपिल सिब्बल और राजीव धवन ने पिछली सुनवाई को दलील दी थी कि दीवानी अपीलों को या तो 5 या 7 न्यायाधीशों की पीठ को सौंपा जाए या इसे इसकी संवेदनशील प्रकृति तथा देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने और लोकतंत्र पर इसके प्रभाव को ध्यान में रखते हुए 2019 के चुनाव बाद के लिए रखा जाए।

बता दें कि अयोध्या विवाद में 30 सितम्बर 2010 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने अपने फैसले में 2.77 एकड़ विवादित जमीन को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा तथा रामलला के बीच बराबर हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ 14 पक्षकारों ने शीर्ष अदालत में विशेष अनुमति याचिका दायर की है।

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Web Title: live supreme hearing on ayodhya to begin in a short time

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