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ब्रज मोहन सिंह 

येदियुरप्पा जब कर्नाटक के तीसरी बार मुख्यमंत्री बने,उनको यकीन रहा होगा कि बहुमत की ताकत नहीं है। उनको यह भी पता होगा कि कहीं उनका हाल पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी वाला न हो जाए,जो सबसे बड़ी पार्टी के नेता होकर भी 1996 में केंद्र में अपनी सरकार नहीं बचा सके।

इतना कुछ जानते हुए भी येदियुरप्पा ने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली।लेकिन उनकी सरकार महज 55 घंटे चली। जब येदयुरप्पा ने विधान सभा में विश्वास मत पेश किया तभी ऐसा लग रहा था कि यह विदाई भाषण ज्यादा लग रहा था, उन्होंने फ्लोर टेस्ट से पहले ही इस्तीफे का एलान कर दिया। 

येदियुरप्पा ऐसे पहले शख्स हैं जिनके नेतृत्व में दक्षिण भारत में पहली बार कमल का फूल खिला था। कर्नाटक के ज़रिये दक्षिण भारत में पैर रखने का सपना येदियुरप्पा ने ही पूरा किया। 15 मई को हुए मतदान के बाद बीजेपी 104 सीटों के साथ पहले स्थान पर तो रही लेकिन बहुमत से 7 कदम दूर। 

वाजपेयी की सरकार तो एक वोट से गिर गयी थी, उनका अपना सम्मान था, एक निष्कलंक सियासी जीवन था। क्या येदियुरप्पा अटल बिहारी वाजपेयी बनना चाहते थे? जो माइनिंग घोटाले में जेल काटकर भी आए थे। खबर यह बताई जा रही थी कि प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह नहीं चाहते थे कि आखिरी वक़्त में पार्टी की और ज्यादा फजीहत हो, इसलिए विदाई भाषण की स्क्रिप्ट सोच समझ कर तैयार की गई थी।

15 वर्ष की उम्र में आरएसएस में शामिल हुए येदियुरप्पा 1975 में शिकारीपुरा तालुका के जनसंघ के प्रमुख बने। मेहनत, लगन और संघर्ष के दम पर येदियुरप्पा 1983 में विधायक बन गए। 1975 में आपातकाल का विरोध में जेल भी गए। वर्ष 2004 में भी कर्णाटक में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी लेकिन कांग्रेस और जेडीएस ने मिलकर सरकार बना ली।
 
वर्ष 2007 में जब कर्नाटक में राजनीतिक उलटफेर का दौर चल रहा था, येदियुरप्पा ने जेडीएस और बीजेपी ने आपसी मतभेदों को दूर कर सत्ता की राह आसान की। 2008 में बीजेपी ने अपनी पहली सरकार बना ली। येदियुरप्पा का शासनकाल विवादों में घिरा रहा और उनको तीन साल के बाद खनन घोटाले में फंसने की वजह से 2011 में इस्तीफा देना पड़ा। 2013 के विधानसभा चुनाव के दौरान येदियुरप्पा ने अपनी अलग पार्टी बनाई जिसकी वजह से बीजेपी को भारी नुकसान हुआ। 2013 के चुनाव में भाजपा को महज 40 सीटें मिलीं। 

येदियुरप्पा फिर बीजेपी में वापस आ गए। संकटों से उबरना, संघर्ष करना येदियुरप्पा की पहचान रही है, जिसके बूते उन्होंने राजनीतिक धुरंधर के रूप में खुद को साबित कर लिया है।अब येदियुरप्पा के सामने अगली चुनौती होगी कि 2019 लोक सभा चुनाव में कर्नाटक में बीजेपी किस तरह प्रदर्शन कर पाती है। येदियुरप्पा ने सही कहा कि वह जल्द वापस लौटेंगे।

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Web Title: karnataka election 2018


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