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ब्रज मोहन सिंह

कर्नाटक के 5 करोड़ मतदाताओं ने अपने मतदान के हक़ का प्रयोग कर दिया है। मतदान भी लोगों ने जम के किया, 222 सीटों के लिए 70 फीसद से ज्यादा मतदान हुआ है। वैसे आधिकारिक नतीजे 15 मई को आएँगे, लेकिन बड़ी बात यह है कि क्या कांग्रेस कर्नाटक में अपने आखिरी किले को बचा सकेगी?  कर्नाटक का चुनाव राहुल गाँधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद हुआ, ऐसे में जीत और हार दोनों के लिए कांग्रेस को तैयार रहना होगा कहीं ऐसा न हो कि जीत का श्रेय राहुल गाँधी को मिले हार का ठीकरा सिद्दारमैया के सिर फोड़ दिया जाए।

कर्नाटक चुनाव के बाद किये गए 7 में से 5 एग्जिट पोल में बीजेपी को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है, सबसे बड़ा सवाल क्या कांग्रेस अपनी सत्ता बचा लेगी, क्या बीजेपी अपने बूते सरकार बना लेगी, या बीजेपी को जनता दल सेक्युलर का सहारा लेना होगा, आज के समय में तीन तरह के परिदृश्य बनते हुए दिखाई दे रहे हैं।

आने वाले कुछ महीनों में राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के चुनाव होने हैं, ऐसे में राहुल गाँधी के मनोबल पर इस जीत और हार का असर पड़ेगा ज़्यादातर एग्जिट पोल के नतीजे बीजेपी को सबसे बड़ी पार्टी मानकर चल रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ बीजेपी और जनता दल सेक्युलर भी अपने बूते पर सरकार बनाते हुए नज़र नहीं आ रहे हैं। ऐसे में बेहतर हो कि हम नतीजों का इन्तजार करें।

राहुल गाँधी ने गुजरात चुनाव में बहुत शानदार प्रदर्शन किया था लेकिन कर्नाटक में स्थिति बिल्कुल बदली हुई थी।  कर्नाटक में चूँकि कांग्रेस की सरकार थी इसलिये सत्ता विरोधी लहर कांग्रेस के खिलाफ थी फिर भी कांग्रेस अगर इस दक्षिणी राज्य में जीतकर आती है तो इसका क्रेडिट राहुल गाँधी को ही मिलेगा, लेकिन अगर कांग्रेस को सेटबैक मिलता है तो उसके लिए भी कांग्रेस को तैयार रहना पड़ेगा।

वैसे हार-जीत तो पार्टी के साथ लगी रहती है, लेकिन कांग्रेस ने कर्नाटक के चीफ मिनिस्टर सिद्दारमैया को खुलकर खेलने का मौका दिया। बहुत हद तक सिद्दारमैया ने जिस तरह से लिंगायत कार्ड खेला उसने नरेन्द्र मोदी और अमित शाह को कुछ हद तक चुप करवा दिया।

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Web Title: karnataka assembly election 2018


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