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टोक्यो: इस बार के एशियाई खेल भारत के लिए बहुत अच्छे रहे। भारतीय खिलाड़ियों ने इन गेम्स में शानदार प्रदर्शन किया। बैडमिंटन में भी स्टार पीवी सिंधू ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया। पीवी सिंधू अब जापान ओपन में खेलने के लिए उतरेंगी तो फाइनल हारने का अपना सिलसिला खत्म करना चाहेंगी। सिंधू के लिए ये साल काफी अच्छा रहा। उन्होंने ने सभी बड़े टूर्नामेंट्स में रजत पदक जीता जिनमें राष्ट्रमंडल खेल, विश्व चैम्पियनशिप और एशियाई खेल शामिल हैं। सिंधू लंबे समय से फाइनल की बाधा पार नहीं कर पा रही हैं।

वह यहां अपने अभियान का आगाज जापान की सयाका ताकाहाशी के खिलाफ करेंगी। यहां क्वार्टर फाइनल में उनका सामना तीन बार की विश्व चैम्पियन कैरोलिना मारिन या जापान की अकाने यामागुची से हो सकता है। एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली साइना नेहवाल ने सात लाख डालर ईनामी राशि के इस बीडब्ल्यूएफ विश्व टूर सुपर 750 टूर्नामेंट से नाम वापिस ले लिया। किदाम्बी श्रीकांत और एचएस प्रणय भी विश्व चैम्पियनशिप और एशियाई खेलों में मिली नाकामी का गम दूर करने के इरादे से उतरेंगे।

श्रीकांत का सामना पहले दौर में चीन के हुआंग यूशियांग से होगा, जबकि प्रणय इंडोनेशिया के जोनाथन व्रिस्टी से खेलेंगे जिन्होंने एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता। समीर वर्मा का सामना कोरिया के ली डोंग कियुन से होगा। पुरुष युगल में राष्ट्रमंडल खेलों के रजत पदक विजेता सात्विक साइराज रांकीरेड्डी और चिराग शेट्टी का सामना जापान के ताकेशी कामुरा और केइगो सोनोडा से होगा। मनु अत्री और बी सुमीत रेड्डी की टक्कर मलेशिया के गोह वी शेम और तान वी कियोंग से होगी।

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Web Title: Japan Open: PV Sidhu wants to break the cycle of defeat in the final

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