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महिलाओं और वृद्ध लोगों को प्रभावित करने वाले विभिन्न सामाजिक समस्याओं के समाधान हेतु महिला प्रशिक्षण संस्थान द्वारा गांव धमेड़ा, बुलंदशहर में दिनांक 3 जून 2018 ,रविवार नारी शक्ति कैंप का आयोजन किया गया। जिस में ग्रामिण महिलाओं की समस्याओं को सुना गया, एवं उनकी समस्याओं के निवारण का हर संभव प्रयत्न किया गया तथा महिलाओं को उनके कानुनी अधिकार /कानुनी सलाह आदि की विस्तृत जानकारी दी गई । 

संस्थापक शैली सेठी ने ग्रामीण महिलाओ को भारत देश के कानून में महिलाओं को दिए गए अधिकारों की महत्त्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। शैली सेठी ने बताया की महिलाओं को भी भारतीय कानून द्वारा दिए गए अधिकारों के प्रति जागरुकता होनी चाहिए। जिस में से कुछ सविंधान निम्न लिखित हैं :

1.रात में गिरफ्तार न होने का अधिकार- एक महिला को सूरज डूबने के बाद और सूरज उगने से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता, किसी खास मामले में एक प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही ये संभव है |

2.वर्किंग प्लेस में उत्पीड़न के खिलाफ कानून-केंद्र सरकार ने भी महिला कर्मचारियों के लिए नए नियम लागू किए हैं, जिसके तहत वर्किंग प्लेस पर यौन शोषण की शिकायत दर्ज होने पर महिलाओं को जांच लंबित रहने तक 90 दिन की पेड लीव दी जाएगी |

3. कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अधिकार- भारत के हर नागरिक का ये कर्तव्य है कि वो एक महिला को उसके मूल अधिकार- 'जीने के अधिकार' का अनुभव करने दें | गर्भाधान और प्रसव से पूर्व पहचान करने की तकनीक(लिंग चयन पर रोक) अधिनियम (PCPNDT) कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अधिकार देता है |

4. मुफ्त कानूनी मदद के लिए अधिकार- बलात्कार की शिकार हुई किसी भी महिला को मुफ्त कानूनी मदद पाने का पूरा अधिकार है. स्टेशन हाउस आफिसर(SHO) के लिए ये ज़रूरी है कि वो विधिक सेवा प्राधिकरण(Legal Services Authority) को वकील की व्यवस्था करने के लिए सूचित करे|
अथवा अन्य किसी मामले में अगर कोई महिला किसी केस में आरोपी है, तो महिलाओं के लिए कानूनी मदद निःशुल्क है. वह अदालत से सरकारी खर्चे पर वकील करने का अनुरोध कर सकती है. यह केवल गरीब ही नहीं बल्कि किसी भी आर्थिक स्थिति वाली महिला के लिए है. पुलिस महिला की गिरफ्तारी के बाद कानूनी सहायता समिति से संपर्क करती है, जो कि महिला को मुफ्त कानूनी सलाह देने की व्यवस्था करती है |

5.घरेलू हिंसा रोकथाम कानून-घरेलू हिंसा का मतलब है महिला के साथ किसी भी तरह की हिंसा या प्रताड़ना. घरे-लू हिंसा अधिनियम, 2005 के तहत कोई भी महिला अगर अपने पति या पति के परिवारवालों से प्रताड़ित हो रही है, तो वो घरेलू हिंसा के तहत शिकायत दर्ज करा सकती है | महिला की तरफ से कोई भी हिंसा की शिकायत दर्ज करा सकता है ।

6. संपत्ति पर अधिकार -हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत नए नियमों के आधार पर पुश्तैनी संपत्ति पर महिला और पुरुष, दोनों का बराबर हक है ।

7.पिता की संपत्ति पर अधिकार-भारत का कानून किसी महिला को अपने पिता की पुश्तैनी संपति में पूरा अधिकार देता है | अगर पिता ने खुद जमा की संपति की कोई वसीयत नहीं की है, तब उनकी मौत के बाद संपत्ति में लड़की को भी उसके भाइयों और मां जितना ही हिस्सा मिलेगा ,यहां तक कि शादी के बाद भी यह अधिकार बरकरार रहेगा |

8.पति की संपत्ति से जुड़े हक-शादी के बाद पति की संपत्ति में तो महिला का मालिकाना हक नहीं होता, लेकिन वैवाहिक विवादों की स्थिति में पति की हैसियत के हिसाब से महिला को गुजारा भत्ता मिलना चाहिए | पति की मौत के बाद या तो उसकी वसीयत के मुताबिक या फिर वसीयत न होने की स्थिति में भी पत्नी को संपत्ति में हिस्सा मिलता है | शर्त यह है कि पति केवल अपनी खुद की अर्जित की हुई संपत्ति की ही वसीयत कर सकता है, पुश्तैनी जायदाद की नहीं |

9. कहां करें शिकायत-क्राइम अगेंस्ट वुमन सेल के अलावा 100 नंबर या महिला हेल्पलाइन नंबर 1091 पर कभी भी (सातों दिन चौबीसों घंटे) कॉल कर सकते हैं या अपने इलाके के थाने में शिकायत की जा सकती है |
इस कार्यक्रम में ग्रामिण महिलाओं को सम्मानित भी किया गया ,कार्यक्रम में मुख्य रूप से काजल अत्रिश ,सुमन्त ,सुनिता ,निशांत मौजूद रहे | 

10 . संपत्ति पर अधिकार- हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत नए नियमों के आधार पर पुश्तैनी संपत्ति पर महिला और पुरुष दोनों का बराबर हक है |

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Web Title: information of legal rights for woman

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