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भारत में विकास की बात तो 1947 से हो रही है। नेहरु के समय से लेकर आज तक हमारा सारा का सारा ध्यान गरीबी हटाने पर ही रहा लेकिन नतीजे हामरे सामने ही हैं। सच ही कहा जाता है कि हमारी सरकारों ने गरीबी हटाओं के नाम पर गरीबों को हटाने का काम ज्यादा किया। आज़ादी के बाद नेहरु के समाजवाद ने देश में कितनी तरक्की लाई, इसको समझने के लिए आपको उस समय के तकरीरों नारों पर ध्यान देना होगा।आज भी हिंदुस्तान के हालात नहीं बदले हैं।

समाजवाद बबुआ, धीरे-धीरे आई ।
समाजवाद उनके धीरे-धीरे आई।
हाथी से आई, घोड़ा से आई।
अँगरेजी बाजा बजाई, समाजवाद।

1978 में लिखी गोरखनाथ पांडे की इस कविता में झलक मिलती है कि किस तरह समाजवाद देश के मनोमस्तिष्क पर उस वक़्त हावी रहा होगा।भारत की नजदीकियां उस वक़्त सोवियत संघ से ज्यादा थीं, जिसका असर भारत की आर्थिक नीतियों और यहाँ के विकास पर भी खूब पड़ा। नेहरु समर्थकों का एक एक ही नारा था इस समय कि “नेहरु के हाथ मजबूत करो”. विरोध की तनिक भी गुंजाईश नहीं थी। लेकिन फिर भी आर्थिक विकास से जुड़े कुछ नारे व्यवस्था बदले जाने की मांग कर रहे थे।

“रोजी रोटी दे न सकी जो वह सरकार निकम्मी है,” जो सरकार निकम्मी है, वह सरकार  बदलनी है.” (समाजवादियों ने यह नारा इंदिरा गांधी के खिलाफ दिया था )1971 में इंदिरा गांधी ने नारा दिया था गरीबी हटाओ. उस दौरान वो अपनी हर चुनावी सभा में अपने भाषण के अंत में एक ही वाक्य दोहराती थीं- ‘वे कहते हैं, इंदिरा हटाओ, मैं कहती हूं गरीबी हटाओ, फैसला आपको करना है) विरोधियों ने नारा दिया, “देखो इंदिरा गाँधी का यह खेल, खा गई राशन पी गई तेल,” लेकिन इसका असर नहीं हुआ। 

इंदिरा के पक्ष में भी नारे आए जिसमें कहा जा रहा था “आधी रोटी कहेंगे, इंदिरा को बुलायेंगे।”1975 के बाद जनसंघियों ने भी बहुत से ऐसे नारे दिए, जिसे देश को याद करना चाहिए. इन नारों की हकीक़त देखिये और इतने सालों में देश जी तरक्की कितनी हुई, यह भी देखिये और समझिए।

1980 और 1990 के दशक में भी कांग्रेस ने योजनाओं के सिफ नाम ही बदले, हकीकत में बदलाव कुछ नहीं हुआ। राजीव गाँधी ने खुद हो कहा कि केंद्र अगर एक रुपया भेजती है तो लोगों तक सिर्फ दस पैसे ही पहुँचते हैं, 90 पैसे लोग बीच में ही उड़ा जाते हैं।गरीबी हटाओ अब तक दिए गए नारों में सबसे लम्बे समय तक मशहूर रहा, इसका सबसे  ज्यादा फायदा इंदिरा को मिला।  

 1975 में इंदिरा ने 20 सूत्रीय कार्यक्रम जारी किया जिसका मकसद था देश से गरीबी दूर करना, इस कार्यक्रम को राजीव गाँधी भी लागु करते रहे, राहुल भी लागु करते रहे. लेकिन देश से गरीबी दूर नहीं हुई। 1971 में देश में गरीबी के दर 57 फीसद थी, आज वह घटकर 37 फीसद हो गई, लेकिन आज भी दुनिया भर की 8 फीसद  गरीब जनता भारत में रहती है। 70 सालों की कहानी यही है कि हमारे नेता अमीर होते गए, लोग गरीब होते गए।
 

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Web Title: india is a poor country where the common man becomes poor


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