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नई दिल्ली : दीपावली पर उच्चतम न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करके पटाखे चलाए जाने के एक दिन बाद बृहस्पतिवार की सुबह राजधानी दिल्ली की हवा बेहद जहरीली हो गयी ।
 दीवाली के बाद पहली सुबह में देश के कई भागों में जहरीली धुंध छाई रही और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तथा एनसीआर में प्रदूषण ‘‘गंभीर ’’ स्तर को पार कर ‘‘बेहद गंभीर और ‘‘आपात ’’स्तर तक पहुंच गया।

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कानून और इसके क्रियान्वयन को लेकर भारी अंतर के बीच, आकाश में धुएं के बादल छाए रहे और विशेषकर दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में इस साल की हवा की सबसे खराब गुणवत्ता दर्ज की गई।।
   अधिकारियों ने कहा कि पटाखों, पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने और मौसम की स्थानीय स्थितियों के जहरीले मिश्रण के कारण राष्ट्रीय राजधानी और इसके आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर ‘‘अत्यंत गंभीर और आपातकालीन'’ सीवियर प्लस एमरजेंसी श्रेणी में प्रवेश कर गया जो अनुमति की सीमा से दस गुना अधिक है।

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उच्चतम न्यायालय ने देशभर में ‘‘पर्यावरण अनुकूल’’ पटाखों की बिव्री और निर्माण की अनुमति दी थी और आतिशबाजी के लिए दो घंटे का समय तय किया था। हालांकि आदेश का उल्लंघन करते हुए लोगों ने रात आठ से दस बजे तक की समयसीमा के दो घंटे बाद मध्यरात्रि तक तथा गुरुवार को सुबह पटाखे चलाए। केंद्र द्वारा संचालित सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्र्च सफरी के मुताबिक, पटाखों से पैदा हुए धुएं सहित अन्य कारणों से दिल्ली में समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांर्क एक्यूआईी 642 तक पहुंचा जो ‘‘अत्यंत गंभीर और आपातकालीन’’ श्रेणी में आता है। समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक अनुमति योग्य सीमा से 11 गुना अधिक दर्ज किया गया।

दिवाली के बाद दिल्ली का प्रदूषण स्तर पिछले साल की तुलना में करीब दो गुना रहा। बृहस्पतिवार को एक्यूआई 642 के आंकड़े पर दर्ज किया गया जबकि वर्ष 2017 मेर्ं दिवाली के अगले दिनी एक्यूआई 367 पर जबकि 2016 में 425 पर दर्ज किया गया था।

वायु गुणवत्ता के इस श्रेणी में पहुंचने का मतलब यह है कि इस जहरीली हवा में ज्यादा देर तक रहने से स्वस्थ लोगों को भी सांस संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। यह हवा बीमार व्यक्तियों को तो गंभीर रुप से प्रभावित करेगी ही।
    शून्य और 50 के बीच एक्यूआई को ‘अच्छा’ माना जाता है, 51 और 100 के बीच इसे ‘संतोषजनक’, 101 और 200 के बीच ‘मध्यम’ माना जाता है, 201 और 300 के बीच ‘खराब’, 301 और 400 के बीच ‘काफी खराब’ और 401 और 500 के बीच इसे ‘अत्यंत गंभीर’ माना जाता है। शीर्ष अदालत के निर्देश का उल्लंघन मुंबई, कोलकाता, जयपुर, चंडीगढ़ तथा अन्य शहरों में भी हुआ।

‘सफर’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली की वायु गुणवत्ता अगले दो दिन ‘गंभीर’ श्रेणी में रहने का अनुमान है क्योंकि पटाखों से निकले धुएं ने प्रदूषकों के छितराने की प्रव्रिया धीमी कर दी है। 
       दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग ने गुरुवार को रात 11 बजे से 11 नवंबर को रात 11 बजे तक शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी है. उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकार ने कहा कि वह स्थिति पर गौर कर रहा है और अगर प्रदूषण का स्तर बढ़ता है तो आपातकालीन उपाय किये जाएंगे। इन उपायों में निजी वाहनों के लिए ‘सम-विषम’ योजना शामिल है.

ट्विटर पर मास्क पहने लोगों द्वारा पटाखे चलाने की तस्वीरें साझा की गईं और शीर्ष अदालत के निर्देश की ‘‘सामूहिक अवमानना’’ की निंदा की गई। एक कारपोरेट वकील आदित्य पेरिवाल ने कहा, ‘‘दिल्ली में अब कोई किसान पराली नहीं जला रहा है. उन्हें जिम्मेदार मत ठहराइए। दिल्लीवालों, आपको जो मिला आप उसके हकदार हैं। प्रदूषण का स्तर तीन घंटे में 120 से 999 पहुंच गया। अदालत की खुलेआम अवमानना। लेकिन यह आश्चर्यचकित करने वाला नहीं, आखिरकार यह दिल्ली है.’’  
 

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Web Title: Delhi's Air became More pollutd after Diwali Firecrackers

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