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(ब्रजमोहन सिंह) 

जदयू ने लोकसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है, अब इस घुड़की का असर दिखना भी शुरू हो गया है। 2019 से पहले जदयू और बीजेपी सीटों को लेकर अभी से हिसाब-किताब करने के मूड में दिख रहे हैं।लीडरशिप और सीट शेयरिंग को लेकर बढ़ती अटकलबाजियों के बाद, बिहार के उपमुख्यमंत्री और भाजपा के नेता सुशील कुमार मोदी को सामने आना पड़ा और मीडिया के सामने ऐलान करना पड़ा कि बिहार में एनडीए के नेता बड़े भाई नीतीश कुमार ही होंगे।सुशिल कुमार मोदी जो इस वक़्त बिहार के उपमुख्यमंत्री भी हैं, ने कहा कि  “देश के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वहीं बिहार के नेता होंगे नीतीश कुमार”। 

बिहार में वोट मोदी और नीतीश कुमार के नाम पर ही मिलेगा, इसमें किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए। जदयू की तरफ से लगातार यह दवाब था कि बीजेपी नीतीश के नाम पर साफ़-साफ़ घोषणा करें कि वही बिहार में एनडीए के सर्वोपरि नेता होंगे। जदयू ने 2019 के चुनाव के लिए नीतीश कुमार को बिहार का चेहरा बनाया है, सुशील मोदी ने कहा, 'हमारे और जदयू के बीच कोई विवाद नहीं है।' इसका असर यह होगा कि बिहार में होने वाली तमाम रैलियों में नीतीश ही छाये रहेंगे।

मोदी ने कहा कि दोनों दलों के दिल मिल गए, अब सीट कोई बड़ी बात नहीं है। सीट को लेकर अभी से मथापच्ची करने की ज़रुरत नहीं है, हम जिस दिन बैठेंगे, हो जाएगा उस दिन फैसला। 7 जून को पटना में एनडीए की बैठक होने वाली है, इससे पहले सुशील कुमार मोदी के बयान से अटकलबाजियों पर काफी हद तक विराम लग जाएगा । 

भाजपा और जदयू के रिश्ते उतर चढ़ाव से भरे रहे हैं लेकिन आज के वक़्त में दोनों के पास साथ चलने के अलावा कोई विकल्प भी नहीं है।आज बीजेपी के सामने नीतीश से बेहतर संबंध बनाए रखने के अलावा और कोई विकल्प भी नहीं है, वहीँ यह भी समझना चाहिए कि एनडीए से बाहर अब नीतीश की पूछ वैसी नहीं रहेगी।

अब सवाल सीटों का है, बिहार के 40 सीटों में से जदयू को कितनी सीटें मिलेंगी और बीजेपी को कितनी, इसका फैसला फिलहाल दोनों पार्टियों ने समय पर छोड़ दिया है। क्या जदयू 15 सीटों को लेकर राजी हो जाएगा , क्या बीजेपी को मिलेगी इस बार 25 सीटें। अभी तो असली खेल शुरू हुआ ही है।

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Web Title: bihar politics

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