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हमारा भारत त्यौहार प्रधान देश है। यहां हर साल अनेकों त्योहार मनाए जाते हैं। सभी त्योहारों में सबसे प्यारा त्यौहार हैं रक्षाबंधन और इसी के तरह भाईदूज भी एक प्यार भरे रिश्ते का त्योहार है। इस दिन बहने अपने भाई को तिलक लगाती हैं। दिपावली के दूसरे दिन मनाया जाने वाले भाई दूज भी इसी परंपरा का हिस्सा है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाई जाती है। इस साल त्योहार आज यानी कि 9 नवंबर को मनाया जा रहा है।

माना जाता है कि अगर अपराह्न के वक्त द्वितीया तिथि लग जाए तो उस दिन भाई दूज नहीं मनानी चाहिए। मान्यता के अनुसार ऐसे में भाईदूज अगले दिन मनानी चाहिए। हां, अगर ऐसा हो जाए कि अपराह्न के वक्त द्वितीया तिथि नहीं लगे तो भाई दूज या भैया दूज अगले दिन मनाई जाती है। वहीं, कुछ लोग कार्तिक शुक्ल पक्ष में मध्याह्न यानी दिन के तीसरे भाग में प्रतिपदा तिथि शुरू होने पर भाईदूज मनाते हैं।

शुभ मुहूर्त- शुभ मुहूर्त शुरू- दोपहर 1:10 मिनट
शुभ मुहूर्त समाप्त- दोपहर 3:27 मिनट
शुभ मुहूर्त की अवधि- 2 घंटे 17 मिनट

पूजा विधि- भाईदूज या भैया दूज की पूजा बहनों द्वारा की जाती है। इस दिन सबसे पहले नहा धोकर तैयार हो जाएं। फिर आटे का चौक तैयार कर लें। अगर आप व्रत करती हैं तो सूर्य को जल देकर व्रत शुरू करें। शुभ मुहूर्त आने पर भाई को चौक पर बिठाएं और उसके हाथों की पूजा करें। सबसे पहले भाई की हथेली में चावल का घोल लगाएं। फिर उसमें सिंदूर, पान, सुपारी और फूल वगैरह रखें। अंत में हाथों पर पानी अर्पण कर मंत्रजाप करें। इसके बाद भाई का मुंह मीठा कराएं और खुद भी मीठा खाएं। शाम के समय यमराज के नाम का दीया जरूर जलाएं।
 

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Web Title: Bhai Dooj 2018

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