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पटना साहिब: बाबा इकबाल सिंह जी, अध्यक्ष, कलगीधर ट्रस्ट/ सोसायटी, गुरुद्वारा बडू साहिब, जिन का मुख्यालय हिमाचल प्रदेश में स्थित है, को 8 जुलाई 2018 को तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब में वहाँ के जत्थेदार ज्ञानी इकबाल सिंह जी खालसा द्वारा प्रतिष्ठित खिताब 'शिरोमणि पंथ रतन' (सिख समाज के बहुमूल्य हीरे) से सम्मानित किया गया। यह ख़िताब उनको दस गुरु साहिबान द्वारा दर्शाए आध्यात्मिक मार्ग को सांसारिक ज्ञान के साथ जोड़ कर मूल्य आधारित शिक्षा के माध्यम से प्रचारित एवं प्रसारित करने सिख धर्म और बाणी को संसार भर में फैलाने के लिए उनके योगदान और समुदाय के लिए उनकी असाधारण सेवाएं के प्रति सराहना दर्शाता है।

तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब में आयोजित एक कार्यक्रम में, स. करनैल सिंह पंंजोली - सदस्य एसजीपीसी,प्रबंधन तख्त श्री पटना साहिब , बडू साहिब के स्वयंसेवकों और कई अन्य जानी मानी हस्तियाँ इस ऐतिहासिक अवसर के लिए बाबा इकबाल सिंह को बधाई देने के लिए मौजूद थे। दरअसल, पहल करने का श्रेय सिंह साहिब ज्ञानी इकबाल सिंह खालसा, जत्थेदार, पटना साहिब तख्त को जाता है, जिन्होंने हमारे समय की सबसे बड़ी जीवित किंवदंतियों में से एक को सम्मानित करने के लिए समय की आवश्यकता को महसूस किया।

"शिरोमणि पंथ रतन" शीर्षक का शाब्दिक अर्थ है  वैश्विक सिख समुदाय के हीरे  और यह सम्मान सिख समुदाय को समर्पित असाधारण और मेधावी सेवाओं के लिए तख्तों में से किसी एक तख्त द्वारा किसी व्यक्ति को दिया जाने वाला उच्चतम सम्मान का खिताब है। इससे पहले ये सम्मान सिख समुदाय के लिए किये कार्यों के लिए एस गुरचरण सिंह तोहरा, मास्टर तारा सिंह, ज्ञानी संत सिंह मस्कीन, हरभजन सिंह खालसा योगी, उनकी पत्नी बीबी इंद्रजीत कौर, भाई जसबीर सिंह और बाबा हरभजन सिंह हरियाँ बेलां वाले को दिए गए थे । बीबी इंद्रजीत कौर के अलावा, सभी पुरस्कार मरणोपरांत थे। यह पहली बार है कि बाबा इकबाल सिंह, बरू साहिब वालों, जैसे जीवित  दिव्य चरित्र को शिरोमणि पंथ रतन के सम्मान  से उनके जीवनकाल के दौरान उनके द्वारा सिख समुदाय के कल्याण के साथ-साथ पूरी मानवता की चरदीकलां के लिए किये गए उनके कार्यो के लिए सम्मानित किया गया है। उन्हें  सब बाबा जी के नाम से जानते है और उन्होंने दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा दिए गए सिख मूल्यों को फैलाने के लिए अपना पूरा जीवन और हर सांस लगा दी।

सन  1986 में जब बाबा जी हिमाचल प्रदेश के कृषि निदेशक के ऊँचे ओहदे से सेवानिवृत्त हुए तो आपने बिना कोई समय गवाए बडू साहिब की शांतिपूर्ण तलहटी में केवल 5 बच्चों से एक स्कूल की शुरुआत की।  पाठ्यक्रम आध्यात्मिक और सांसारिक ज्ञान का एक संश्लेषण था। धीरे धीरे इस स्कूल में बच्चे बढ़ते गए। कई स्वयंसेवकों और समर्थकों ने बाबा जी से कहा की जो आपने शर्तें लगाई है जैसे की बच्चों का सादा लिबास होगा। सफेद चूड़ीदार पजामा कुरता और गोल दस्तार पहनना, शुद्ध शाकाहारी भोजन खाना और अमृत वेले (ब्रह्म मुहूर्त) उठ कर नितनेम करना;  इन सब शर्तों के साथ स्कूल नहीं चलेंगें तो  बाबा जी  ने कहा कि अगर मेरे गुरु साहिब को भायेगा तो स्कूल चलेंगें नहीं तो बंद हो जायेंगें।  गुरु साहिबान की कुछ ऐसे कृपा हुई कि इन स्कूलों की श्रृंखला इस कदर आगे बढ़ी की आज 129 स्कूल बन चुके है जिनमें 70,000 बच्चे सांसारिक और आध्यात्मिक शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। 

जैसे कि  कलगीधर सोसाइटी के संस्थापक पिता संत बाबा अत्तर सिंह जी महाराज मस्तुआने वालों के द्वारा संकल्पित किया गया था की  अच्छी मानवता आध्यात्मिक और सांसरिक शिक्षा के सुमेल से ही प्रफुल्लत होगी, बाबा जी उनके कहे अनुसार एक दृढ़ निश्चय के साथ हर आंधी, तूफान , धूप छाया, उतार चढ़ाव को एक अटल चट्टान की तरह सामना करते हुए निरंतर इस मूल्य आधारित शिक्षा के लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ते रहे जिसकी वजह से  सिख जगत  में शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रांति आई है।  

पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश के अधिकांश ग्रामीण हिस्सों में, जो शैक्षिक संसाधनों से वंचित थे, जल्द ही बाबाजी द्वारा अकाल अकादमियों के गठन किया गया और  वहाँ के प्रारंभिक छात्रों में से अधिकांश अपने परिवारों में पहली पीढ़ी थे जिन्होंने इन शिक्षण संस्थानों में दाखिला लिया।   ग्रामीण स्कूलों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनाने और मानक पट्टी बढ़ाने का श्रेय बाबा इकबाल सिंह को जाता है।

तलवंडी साबो में गुरु की काशी बनाने का दसवें गुरु का चौथा बचन  315 साल बीतने के बावजूद एक अधूरा कार्य था। इस विशाल कार्य को अपने जीवन के नब्बवे दशक में बाबा जी द्वारा आसानी से गले लगा लिया गया था। मौद्रिक चुनौतियों की सलाह देने के बावजूद, बाबा जी ने भारी बैंक ऋण लिया और  500 करोड़ रु के खर्च से एक विश्व स्तरीय अकाल यूनिवर्सिटी बनाने का कठिन कार्य  27 महीने के रिकॉर्ड समय में सम्पूर्ण कर दिखाया। आज यहाँ  21 विभिन्न पाठ्यक्रमों पढ़ाए जा रहे है।

वर्तमान में कलगीधर ट्रस्ट / सोसाइटी बडू साहिब के अधीन 129 स्कूल, 2 विश्वविद्यालय, 1 ऑनलाइन विश्वविद्यालय, 3 नशा मुक्ति केंद्र, 6 शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र और 1 अस्पताल चल रहा  है। यह सभी संस्थान बाबा इकबाल सिंह बडू  साहिब वालों  की क्रांतिकारी सेवाओं को प्रतिबिंबित करते हुए सिख धर्म के प्रति उनकी भक्ति और जुनून की अभिव्यक्ति करते है। इतना ही, कि आईआईएम अहमदाबाद ने अकाल अकादमियों को एक केस-स्टडी के लिए चुना, जिसने सभी आईआईएम में से  फिलिप थॉमस मेमोरियल पुरस्कार जीता और इस केस स्टडी को हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू पर भी सूचीबद्ध किया गया है ।
   
सिख समुदाय, इस महान व्यक्तित्व, जिन्होंने अपना पूरा जीवन समुदाय के सेवाओं में समर्पित कर दिया, को ""शिरोमणि पंथ रतन" के प्रतिष्ठित ख़िताब  से  सम्मानित करने के  तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब के जत्थेदार ज्ञानी  इकबाल सिंह खालसा जी के इस फैसले की सराहना करता है 

इस अवसर पर जब हमने बाबाजी से बात की, तो उन्होंने अपने दोनों हाथ जोड़ कर विनम्रता से कहा, "निरगुणु राखि लीआ संतन का सदका"- मैं योग्य नहीं हूं, लेकिन उन्होंने संतों के लिए मुझे बचा लिया है। "

उन्होंने आगे कहा, "मैं उम्मीद करता हूं कि मेरी टीम गुरु साहिब के इन दिव्य शब्दों का पालन करेगी  - " सेवा करत होए निहकामी, तिस को होत प्राप्त स्वामी" - जो इनाम के विचार के बिना सेवा करता है, वही अपने भगवान और गुरु को प्राप्त करेगा।"

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Web Title: baba iqbal singh honored with shiromani panth ratan

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