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लखनऊः लोकसभा चुनावों को देखते हुए उत्तर प्रदेश में दो बड़ी पार्टियों ने गठबंधन कर लिया। मायावती की बसपा और अखिलेश की सपा पार्टी में महागठबंधन तो हो गया है, लेकिन क्या ये गठबंधन फिर से एक बार वही करिश्मा कर पाएंगे, जो मुलायम यादव और कांशीराम ने कर दिखाया था। 23 साल की दुश्मनी को भुलाकर दोनों ने एक दूसरे का हाथ थाम लिया है। आज मायावती और अखिलेश यादान सांझी प्रेस कान्फ्रेंस करेंगे। 

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1993 में राम मंदिर आंदोलन पर सवार बीजेपी को हराने वाली मुलायम-कांशीराम की जोड़ी की तरह मोदी लहर पर सवार पार्टी को हराने के लिए अखिलेश-मायावती की जोड़ी बन रही है। हालांकि 1993 से लेकर 2019 तक गंगा-गोमती और यमुना में बहुत पानी बह चुका है। यही वजह है कि माया-अखिलेश वाले इस गठबंधन के लिए 25 साल पहले जैसे नतीजे दोहराना बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

सपा-बसपा गठबंधन में सीट शेयरिंग

अखिलेश यादव और मायावती कांग्रेस को अलग रखकर सूबे में गठबंधन कर रहे हैं। इसकी घोषणा शनिवार को दोनों नेता अपनी ज्वाइंट कॉफ्रेंस में कर सकते हैं। सीट शेयरिंग फॉर्मूला भी तभी सामने आएगा। माना जा रहा है कि सपा 36 और बसपा 37 सीट पर चुनाव लड़ेगी।गठबंधन अपने उम्मीदवार नहीं उतारेगा।

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सपा-बसपा के गठबंधन के बाद राजनीतिक पंडित मानकर चल रहे हैं कि बीजेपी के लिए सूबे की राह आसान नहीं होगी। इसके लिए वो 1993 में सपा-बसपा गठबंधन का उदाहरण दे रहे हैं, लेकिन मौजूदा सियासी माहौल को अगर राजनीतिक और जातीय समीकरण के मद्देनजर देंखे तो 25 साल पहले जैसे हालात आज नहीं हैं।

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Web Title: akhilesh yadav mayawati alliance in Uttar Pardesh

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