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चंडीगढ़: नगर के शिक्षा विभाग के सचिव की ओर से शहर में दसवीं में फेल हुए छात्रों को राजकीय स्कूलों में दोबारा एडमिशन देने से साफ इंकार करने पर राजनीतिक नेताओं एवं अभिभावकों की ओर से इस फैसले का कड़ा विरोध करने पर सोमवार को शिक्षा सचिव ने अपने पुराने दिए फैसले को वापस ले लिया। शिक्षा सचिव की ओर से आज जारी आदेशों में दसवीं की परीक्षा में फेल हुए 1299 छात्रों को उन्हीं के पुराने स्कूलों में दाखिला देने के आदेश कर दिए। वहीं दसवी की परीक्षा में 4308 छात्रों की कंपार्टमेंट आने पर उन्हें प्लस वन में अंतरिम प्रवेश दिया जाएगा। वहीं इन छात्रों को कंपार्टमैंट का क्लेयर करने के लिए स्पैशल कक्षाएं स्कूलों में लगाई जाएंगी। जब तक इन कंपार्टमैंट धारक छात्रों को अपने स्कूलों में विभाग की ओर से लगाई जा रही स्पैशल कक्षाओं को लगाना अनिवार्य होगा।

 स्मरण रहे उक्त समाचार को दैनिक सवेरा टाइम्स की ओर से गत शुक्रवार को प्रमुखता के साथ प्रकाशित करने के बाद राजनीति के गलियारे एवं अभिभावकों में हड़कंप मचने पर विभाग के फैसले पर सभी सकते में पड़ गए थे। शहर में पहली बार किसी शिक्षा सचिव ने ऐसा पहली बार फैसला लिया था। शिक्षा सचिव ने कहा था कि शहर में जो छात्र इस बार दसवीं की परीक्षा में फेल हो चुके हैं उन्हें अब शिक्षा विभाग की ओर से दोबारा स्कूलों में एडमिशन नहीं देने का फैसला किया है। यही नहीं शिक्षा विभाग के एडिड स्कूलों में भी दसवीं में फेल हुए छात्रों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा था कि चंडीगढ़ के राजकीय एवं विभाग के एडिड स्कूलों के छात्र टीचर्स की ओर से कड़ी मेहनत करने के बाद फेल हो जाएं तो बड़ी शर्म की बात है। अगर यह बच्चे गांवों के होते तो दूसरी बात है लेकिन गांवों में रहने वाले बच्चे शहरों के स्कूलों के बच्चों से अच्छे अंक प्राप्त कर रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि दसवीं में फेल होने वाले छात्र अब चाहें पंजाब में जाएं या दूसरे राज्य में पर चंडीगढ़ के राजकीय स्कूलों में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह बच्चे ओपन स्कूल से दसवीं की पढ़ाई करें या फिर कोई काम धंधा करें। उन्होंने कहा कि वह अब शहर में राजकीय स्कूलों में परिणाम के गिरते स्तर को और खराब नहीं होने देने का फैसला किया है।  देश में केंद्र सरकार जहां बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के दावे कर रही है और दूसरी ओर चंडीगढ़ शिक्षा विभाग की ओर से दसवीं की परीक्षा में फेल छात्रों को दोबारा प्रवेश न देने के आदेश जारी कर शिक्षा प्राप्त करने से दूर कर रहा है। इस पर विभाग ने पहले 10 टीचर्स, प्रिंसीपल व हैडस को सस्पेंड कर दिया तो 55 के करीब स्कूल प्रिंसीपलों को कारण बताओ नोटिस जारी किया।

उन्होंने कहा था कि जो टीचर सही तरीके से काम नहीं करेगा उसे यहां नहीं रहने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब कूलों में टीचर्स को नेतागिरी करने की बजाय छात्रों को पढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना होगा। शिक्षा सचिव ने कहा कि शहर में अब राजकीय स्कूलों में तय सीटों से ज्यादा छात्रों को एडमिशन नहीं दी जाएगी। अब राजकीय स्कूलों में टीचर- छात्र के अनुपात को सुधारा जा रहा है। 

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Web Title: admission in state schools


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