image

आप चाहें तो राहुल गाँधी को संसद में दिए गए उनके भाषण के लिए उनकी पीठ थपथपा सकते हैं। क्योंकि उन्होंने देश के सामने जो भी मुद्दे उठाये वो सही थे, उनका आक्रामक अंदाज़ भी देखने वाला था। कहा गया कि अब तक का यह राहुल गाँधी का सबसे अच्छा भाषण था जो उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव पर हो रही बहस के दौरान दिया।

सबसे पहले राहुल गाँधी का जुमला स्ट्राइक, जिसकी शरुआत उन्होंने खुबसूरत अंदाज़ में की। युवाओं, दलितों, किसानों की बात करके राहुल ने देश की नब्ज़ को समझने का कम से कम से दावा तो किया। और फिर देश की जनता को न मिल सका, उस पंद्रह लाख रूपये की बात भी राहुल गाँधी ने की।

राहुल गाँधी ने आक्रामक अंदाज़ में अमित शाह और राफेल डील के बारे में सवाल पुछा, जिसका करारा जवाब रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी दिया, लेकिन यहीं राहुल गाँधी गच्चा खा गए। क्या उनके पास इसके डिटेल्स नहीं थे की राफेल डील कांग्रेस सरकार के समय हुई, जब ए के एंटनी देश के रक्षा मंत्री हुआ करते थे।  क्या उन्हें नहीं पता था कि राफेल डील में कोई सीक्रेसी क्लॉज़ भी है?

दूसरी बात, उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति से हुई अपनी अनौपचारिक मुलाकात को संसद में उठाया। देश को नहीं पता, संसद को नहीं पता, किसी को नहीं पता की राहुल गाँधी और फ्रांस के राष्ट्रपति के बीच बातचीत में क्या हुआ?आनन फानन में फ्रांस को आधिकारिक तौर पर स्पष्टीकरण भी देना पड़ गया।

ऐसा करने से पहले दोनों देशों के संबंधों पर विचार कर लेते तो शायद यह फजीहत नहीं झेलनी पड़ती। अपने भाषण के अंत में राहुल ने वह किया जिसकी किसी को भी कल्पना नहीं थी, 40 मिनट तक बोलने के बाद राहुल अपने आप पर कण्ट्रोल न रख सके। राहुल अपनी सीट से उठे और चले गए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलने।उन्होंने मोदी से हाथ मिलाया फिर गले भी मिले।

हंसी ठहाकों का दौर, राहुल के अंदाज़ पर तंज भी कसे गए। इतना ही काफी नहीं, संसद में बैठकर उन्होंने फ़िल्मी अंदाज़ में आँख भी मारी, जो कुछ मिनटों के अन्दर वायरल भी हो गया। राहुल ने अपने भाषण में जो वाहवाही कमाई उसे राहुल गाँधी ने गँवा दिया। भाषण के अन्दर जो गंभीर मुद्दे उठाये गए थे वह हवा में फुर्र हो गए।

हर जगह राहुल ही राहुल की चर्चा रही। सोशल मीडिया पर राहुल, टीवी पर राहुल अखबार के पहले पन्ने पर राहुल। लेकिन क्या अविश्वास प्रस्ताव लाने के पीछे जो सोच थी उसमें वो कितने कामयाब हुए?  मोदी का अविश्वास प्रस्ताव जीतना तय था लेकिन यह नहीं तय था कि राहुल अपनी किरिकिरी इस तरह कर लेंगे।

दरअसल यह महागठबंधन का टेस्ट था, जिसमें सेंध लगाने में मोदी कामयाब हो गए। कांग्रेस समर्थित ग्रुप को 126 वोट मिले, वहीँ मोदी के पक्ष में 325 वोट पड़े। क्या इसी तैयारी के साथ आए थे राहुल गाँधी? एनडीए से टीडीपी के अलग होने के बाद मोदी को दक्षिण में एक साथ की दरकार थी, जिसे टीआरएस और एआईएडीएमके ने पूरा कर दिया।

DainikSavera APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS

Web Title: will Rahul Gandhi Compete with PM Modi with These Preparation ?

More News From national

Advertisement
Advertisement
Advertisement
free stats