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नई दिल्ली: देश की राजधानी में धूम्रपान न करने वाले बच्चों, बूढ़ों और महिलाओं के लिए बुरी खबर है। दिल्ली के चिकित्सकों, वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों का कहना है कि राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण का स्तर इस हद तक खतरनाक स्थिति पर पहुंच चुका है कि यहां धूम्रपान नहीं करने वाले लोग भी रोजाना 6 से 7 सिगरेट पी रहे हैं, यानी धुआं निगल रहे हैं। पी.एम. 2.5 नैनो पार्टिकल होते हैं जो 2.5 माइक्रोन से छोटे होते हैं। यह किसी चीज के जलने, औद्योगिक प्रदूषण, वाहनों से निकलने वाले धुएं से पैदा होते हैं। पंखे पर जो काला कार्बन चिपक जाता है वह पी.एम. 2.5 होता है। यह हमारी हवा में भरा हुआ है। डब्ल्यू.एच.ओ. के मानकों के मुताबिक, इसका सुरक्षित स्तर 15 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर है। जबकि 2016 में पूरे साल का औसत था 143 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर, जो कि 90 फीसदी से भी ज्यादा था। 

धूम्रपान नहीं करने वालों के अंदर भी पहुंच रही सिगरेट!
अगर हम दिल्ली के एक साल का औसत देखें तो यह 140 से 150 माइक्रोग्राम क्यूबिक मीटर रहा, जिसे भाग करने पर यह 6 से 7 सिगरेट बनता है। इसलिए हम सब दिल्ली वासियों ने रोजाना कम से कम 6 से 7 सिगरेट तो पी ही हैं, जबकि सर्दियों में इसकी संख्या 10 से 40 सिगरेट तक पहुंच जाती है। पिछले साल पी.एम. 2.5 का स्तर काफी उपर चला गया था तो धूम्रपान नहीं करने वाले लोगों ने भी 40 से 50 सिगरेट पी।

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Web Title: 7 cigarettes are being consumed everyday by children to old age persons in delhi

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