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 ब्रजमोहन सिंह

अकाली दल सांसद और पूर्व प्रधानमंत्री आई.के गुजराल के सुपुत्र नरेश गुजराल इन दिनों कुछ बड़ी राजनीतिक वजहों से खबरों में हैं। गुजराल का नाम राज्य सभा के उप-सभापति पद के लिए ज़ोरों शोरों से चल रहा है। गैर विवादित राजनीतिक छवि के मालिक नरेश गुजराल नरेंद्र मोदी के खास माने जाते हैं, खासकर उनकी भूमिका इसलिए भी अहम हो जाती है क्योंकि वह NDA समेत अन्य  दलों के साथ एक महत्त्वपूर्ण कड़ी का काम करते हैं।

गुजराल बीजेपी से नहीं हैं लेकिन अकाली दल के मार्फ़त उनकी एंट्री देश के पावर सर्किट में आसानी से हो जाती है। जब तक आई के गुजराल साहब जिन्दा थे, उन्होंने रोज़ाना सियासत से दूरी बनाई हुई थी, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि देश में उनके दोस्तों की संख्यां कहीं भी कम है।

कहा ऐसा भी जाता है खुद प्रधानमंत्री मोदी नरेश गुजराल के ज़रिये राजनीतिक फीडबैक भी लेते हैं। राजनीति में गुजराल के सामने यह विकल्प था कि वह कांग्रेस ज्वाइन कर सकते थे लेकिन उन्होंने राजनीति में एंट्री के लिए अकाली दल का दामन थामा।साल 2004 में नरेश गुजराल ने जालंधर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन कांग्रेस के नेता राणा गुरजीत सिंह उस सीट से जीत गए। 1984 में हुए सिख विरोधी दंगे ने उन्हें झकझोरा और उन्होंने कई मौकों पर कांग्रेस के सेक्युलर होने के दावे पर सवाल भी उठाया।

1997 में आई के गुजराल की सरकार बहुत कम समय तक चल सकी लेकिन बहुत कम समय ही गुजराल ने अपने दोस्तों की एक अच्छी खासी मंडली बना ली। जिसमें दिल्ली के बड़े-बड़े नेताओं से लेकर वहां के पत्रकारों और सम्पादकों की अच्छी खासी संख्या है। मोदी दिल्ली की राजनीति में खुद को एक आउटसाइडर मानते हैं, ऐसे में अलग-अलग लोगों तक पहुंचने में गुजराल की भूमिका प्रधानमंत्री के लिए बढ़ जाती है।

विवादों से दूर रहने वाले नरेश गुजराल अपने विरोधियों के खिलाफ भी कभी खुलकर नहीं बोलते शायद यही उनकी सबसे बड़ी मजबूती है। पंजाब के जालंधर शहर से वास्ता रखने वाले गुजराल यहां के सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय रहते हैं और महिलाओं व् बेसहारा लोगों के लिए NGO चलाते हैं। उस वक़्त जब वित्त मंत्री अरुण जेटली ख़राब सेहत की वजह से राज्य सभा में बहुत सक्रिय नहीं हैं, नरेश गुजराल के उप-सभापति बनने की स्थिति में एन.डी.ए सरकार को बहुत बड़ी राहत मिलेगी।

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Web Title: Why Naresh Gujaral is Important for Narendra Modi

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