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रविवार को देश भर में लोकसभा चुनाव की तारीखों का एलान हो गया है। चुनाव आयोग ने 11 अप्रेल से 19 मई के बीच देश भर में चुनाव के लिए वोटिंग का एलान कर दिया है। इन तारीखों की घोषणा होने के साथ ही एक नया विवाद सामने आया है। तीन राज्यों पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश में वोटिंग की तारीखें रमजान के महीने में पड़ रही हैं। ऐसे में मुस्लिम नेताओं और मौलानाओं ने चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल उठाया है। इतना ही नहीं, उन्होंने इन तारीखों में बदलाव की मांग की है।  कोलकाता के मेयर और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता फिरहाद हाकिम ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक निकाय है और हम उसका सम्मान करते हैं। हम चुनाव आयोग के खिलाफ कुछ नहीं कहना चाहते, लेकिन सात फेज में होने वाले चुनाव बिहार, यूपी और पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए कठिन होंगे। 

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इतना ही नहीं, इन चुनावों में सबसे ज्यादा परेशानी मुस्लिमों को होगी क्योंकि वोटिंग की तारीखें रमजान के महीने में रखी गई हैं।  टीएमसी नेता ने कहा कि तीनों राज्यों (यूपी, बिहार और पश्चिम बंगाल) में अल्पसंख्यकों की आबादी बहुत ज्यादा है। मुस्लिम रोजा रखेंगे और अपना वोट भी डालेंगे यह बात चुनाव आयोग को ध्यान में रखनी चाहिए। फरहाद हाकिम ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) चाहती है कि अल्पसंख्यक अपना वोट न डाल पाएं लेकिन हम चिंतित नहीं हैं। लोग अब बीजेपी हटाओ-देश बचाओ के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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वहीं दूसरी ओर इस्लामिक स्कॉलर, लखनऊ ईदगाह के इमाम और शहरकाजी मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने भी चुनावों की इन तारीखों पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से निवेदन किया है कि इन तारीखों को रमजान से पहले या फिर ईद के बाद रखा जाए। फरंगी महली ने कहा, 'चुनाव आयोग ने यूपी में 6,12 और 19 को भी वोट डालने का कहा है। जबकि 5 मई की रमजान मुबारक का चांद दिख सकता है 6 से रमजान का मुबारक महीना शुरू होगा। तीनो तारीखें रमजान के महीने में पड़ेंगी जिससे मुसलमानों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।' उन्होंने कहा कि वह चुनाव आयोग से गुजारिश करते हैं कि चुनाव की तारीखें रमजान से पहले या ईद के बाद रखें ताकि ज्यादा से ज्यादा मुस्लिम वोट डालने निकलें और उन्हें कोई परेशानी न हो। 
 

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Web Title: Loksabha voting during ramzan muslim leaders raise questions

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