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देशभर के किसान अपनी मांगों को लेकर जहां जगह-जगह आंदोलन कर रहे थे। तो वहीं हर बार की तरह इस बार भी सरकार और किसानों के बीच समझौता हो गया है। लेकिन इस समझौते ने कई सवाल पैदा कर दिए है। क्या किसानों को हर बार की तरह एक बार फिर ठगा जाएगा? या फिर इस बार उनकी मांगें पूरी की जाएगी।

जहां महाराष्ट्र किसानों द्वारा 12 मार्च को विस घेराव का फैसला लिया गया था। तो वहीं हजारों की संख्या में राज्य के किसान मुंबई में इकट्ठा हुए थे। इससे पहले महाराष्ट्र सरकार द्वारा किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की गई। जिस बैठक में महाराष्ट्र सरकार ने किसानों को उनकी सभी मांगे पूरा करने का भरोसा दिया। लेकिन यह भरोसा कोई पहली बार नहीं है। जब किसानों ने आंदोलन किया हो और सरकार ने उनसे वादे ना किये हो। ऐसे में सवाल उठते हैं, क्या महाराष्ट्र सरकार द्वारा वाकई किसानों की समस्याओं का समाधान निकाला जाएगा।

अभी तक देश में जितने भी किसान आंदोलन हुए है, उनका आधा-अधूरा हाल किया जाता है और फिर मुद्दा समाप्त हो जाता है। चाहे वो गन्ने का मुद्दा हो या फिर समर्थन मूल्य का मामला हो। किसानों चुनाव और आंदोलन के समय कुछ कर्ज दे दिया जाता है। लेकिन किसानों की समस्या धरी की धरी रह जाती है। ऐसे में किसान फिर आंदोलन करने को मजबूर हो जात हैं। एक बार फिर ऐसा ही देखने को मिल रहा हैं।

किसानों की यह समस्या सिर्फ महाराष्ट्र में ही नहीं बल्कि पूरे देश में हैं। किसानों को देश के चतुर राजनेता अपने शब्द जाल में उलझाते आए हैं। एक बार फिर वहीं कहानी दोहराई गई हैं। जहां 2014 लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने किसानों को दो बड़े आश्वासन दिये थे। जिसमें स्वामीनाथन रिपोर्ट पेश करना और समर्थन मूल्य 50 प्रतिशत जोड़कर देने की मांग की गई थी। तो वहीं 2022 तक देश के हर किसान की आय दोगुनी करने की घोषणा की थी। लेकिन अभी तक सत्ताधारी बीजेपी की सारी की सारी घोषणाएं धरी की धरी नजर आती है। हर बार की तरह देश का किसान इस बार भी ठगा महसूस कर रहा है। आखिर कब देश के अन्नदाता की मांग पूरी होगी?   

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Web Title: why the countrys farmer is cheated even after the announcement

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