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श्वेता पहली बार मां बन कर काफी खुश थी। बच्चे के स्पर्श से उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसे दुनिया भर की खुशियां मिल गई हों। लेकिन कुछ ही दिनों बाद वह परेशान रहने लगी। वह समझ ही नहीं पा रही थी कि उस का कृष इतना रोता क्यों है। दरअसल, छोटे बच्चे के रोने में एक मैसेज छिपा होता है। वह रोकर अपनी मां को कम्युनिकेट करता है कि उसे भूख लगी है। बाल रोग विशेषज्ञ बताते है कि, ‘‘छोटे बच्चे बहुत ही नाजुक होते हैं। उन पर मौसम का जल्द असर होता है। उन्हें बहुत जल्दी ठंड तो बहुत जल्दी गर्मी लगने लगती है। इसी वजह से वे रोते हैं। अधिकांश समय बच्चे भूख लगने की वजह से भी रोते हैं। इसलिए उन्हें थोड़े-थोड़े समय के अंतराल में दूध पिलाती रहें वरना उन्हें कौलिक की समस्या होने लगती है यानी पेट में गैस बनने लगती है, जिस की वजह से बच्चे रोते हैं।’’ 

भूख लगने पर- भूख लगने के कारण न्यू बौर्न बेबी सब से ज्यादा रोते हैं। उन का पेट छोटा होता है इसी वजह से उन्हें एक बार में दूध नहीं पिलाया जा सकता। उन्हें थोड़े-थोड़े अंतराल में दूध पिलाने की जरूरत पड़ती है। इसलिए जब भी बच्चा रोए तो उसे दूध पिलाएं। अगर बच्चा स्तनपान करता है तो उसे दिन में 8-12 बार स्तनपान कराएं। गीले व गंदे डायपर की वजह से गीलापन भला किसे अच्छा लगता है। छोटे बच्चे गीली नैपी में असहज महसूस करते हैं। ज्यादा देर तक बच्चों को गीली नैपी में रखने से रैशेज हो जाते हैं, जिस की वजह से बच्चे बहुत रोते हैं। जब भी बच्चों को नैपी पहनाएं तो समयसमय पर चैक करती रहें कि नैपी गीली तो नहीं है और गीली होने पर तुरंत बदल दें।

गोद में आने के लिए- नवजात शिशु को मां का शारीरिक स्पर्श अच्छा लगता है। वह हमेशा मां के सीने से चिपका रहना चाहता है। कभीकभी वह गोद में आने के लिए रोता भी। गोद में लेने पर उसे अपनेपन का एहसास होता है। बहुत गर्मी या ठंड लगने पर बच्चों की स्किन बहुत संवेदनशील होती है। कमरे का तापमान ठंडा होने पर उन्हें बहुत जल्दी ठंड लगने लगती है तो तापमान ज्यादा होने पर गर्मी भी जल्दी लगती है। गर्मी लगने पर उन की बॉडी में छोटे-छोटे दाने निकलने लगते हैं। इसलिए कोशिश करें कि कमरे का तापमान सामान्य रहे।

गैस बनने पर- 3 सप्ताह से लेकर 3 महीने तक के बच्चों में कौलिक की समस्या सब से ज्यादा रहती है यानी पेट में गैस बनती है जिस की वजह से बच्चे रोते हैं। कभी-कभी किसी तरह की एलर्जी और कीड़े- मकौड़े के काटने की वजह से भी बच्चे रोते हैं। नींद पूरी नहीं होने पर बच्चों की नींद पूरी नहीं होने पर भी वे चिड़चिड़े स्वभाव के हो जाते हैं और रोने लगते हैं। इसलिए उन्हें शांत माहौल में सुलाने की कोशिश करें।

थकान होने पर- कई बार बच्चे थके होते हैं, जिस की वजह से उन्हें नींद नहीं आती है और वे रोते रहते हैं। बीमार होने पर अगर आप का बच्चा बहुत ज्यादा रोने लगता है और अचानक चुप हो जाता है तो इस का मतलब यह है कि वह स्वस्थ नहीं है। आप के बच्चे को आप से बेहतर कौन समझ सकता है। इसलिए अगर आप को हल्का सा भी लग रहा है कि आप का बच्चा स्वस्थ नहीं है तो उसे तुरंत डाक्टर के पास ले जाएं। कभी-कभी बच्चा मां का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए भी रोता है। इसलिए जब भी बच्चा रोए तो उसे गोद में लेकर प्यार से सहलाएं। उसे अहसास दिलाएं कि आप उस के पास हैं।
 

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Web Title: Why are crying little kids, know the reason

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