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शिमला: कोटखाई गुड़िया प्रकरण मामले के पुलिस लाकअप हत्याकांड पर एचएचसी के वायरल हुए पत्र से देश की सर्वोच्च जांच एजैंसी की जांच पर आंच आ गई है। चुंकि गुड़िया प्रकरण मामले में न्यायिक हिरासत में चल रहे आरोपी एचएससी मोहन लाल ने जो पत्र लिखा है उसमें सीबीआई की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठाए गए है। सीबीआई की जांच पर सवाल उठाया गया है कि पुलिस लाकअप हत्याकांड में सीबीआई ने जिस संतरी को सरकारी गवाह बनाया है वह संतरी पुलिस लाकअप हत्याकांड में शामिल था। सीबीआई ने सच्चाई न जाने बिना एक संतरी के कहने पर इस मामले में जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल कर ली जबकि वास्तविकता कुछ और है। सीबीआई की इस कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को लिखे पत्र में इस मामले की जांच सीआईडी या एनआई से करवाने की मांग की गई है। न्यायिक हिरासत में चल रहे आरोपी के पत्र को वायरल होने पर अब जेल महकमे ने भी जांच बैठा दी है। उच्च न्यायालय को लिखे गए पत्र की प्रति राज्यपाल, सीएम, सत्र न्यायाधीश सीबीआई और डीजीपी को भी भेजी गई है। मोहन ने पत्र में लिखा है कि कोटखाई पुलिस थाना में जो कुछ हुआ, इसके बारे में सीबीआई को पूछताछ के दौरान बताया गया था। सीबीआई के एसएसपी एसएस गुरु म, एएसपी आरके शैट्टी ने एक नहीं सुनी और सूरज हत्याकांड के आरोपी को गवाह बना दिया।आरोपी पूर्व एचएचसी मोहन लाल ने पत्र में लिखा है कि जब वह अपने कमरे में सो रहा था तो रात 10 बजकर 15 मिनट पर डीएसपी मनोज जोशी का गनमैन अनिल, निशांत, कर्मचंद और संतरी दिनेश मुजलिम सूरज को मारते पीटते कमरे में लाए। कमरे की लाइट जलाकर इन्होंने पट्टे से सूरज को मारना शुरू किया। मुङो भी एसएचओ राजेंद्र सिंह ने जगाया और पूछा कांस्टेबल रंजीत कहां है। मैंने कहा मुङो पता नहीं। तभी डीएसपी मनोज जोशी वहां पहुंचे। एसएचओ ने थाने के सभी मुलाजिम बुलाए। एसएचओ के बुलाने पर एचसी तुलसी राम, अजय, मुकेश, सुभाष, सुधीर, हेमराज व सुनील भी मेरे कमरे में आए। एसएचओ ने कहा कि सूरज से पूछताछ करो। सभी सूरज को पट्टे से मारने लगे। सूरज फर्श पर पड़ा था और चिल्ला रहा था। सभी बारी-बारी से उसे मार रहे थे। इस बीच संतरी दिनेश मारपीट करने के बाद पसीने से लथपथ होकर वर्दी की कमीज को खोलकर नीचे चला गया और कहा कि मैं क्वार्टर होकर आता हूं। जब सभी लोग सूरज को बुरी तरह से पीट रहे थे, तो मैंने एसएचओ राजेंद्र सिंह से कहा कि इसे मत मारो, आखिर यह भी इंसान है। इसे कुछ हो गया तो तुम फंसोगे। राजेंद्र सिंह ने कहा कि मैं एसएचओ हूं देख लूंगा। आप कमरे से बाहर जाओ। एचएसओ राजेंद्र, अनिल, निशांत, कर्मचंद, अजय, तुलसी, सुभाष, मुकेश व सुनील सूरज को सुभाष के कमरे में ले गए। वहां उसे मारने लगे। मारने से उसके चिल्लाने की आवाज बाहर तक सुनाई दे रही थी। मैं अपने कमरे के बाहर खड़ा था। थोड़ी देर बाद एसएचओ और कांस्टेबल कर्मचंद सुभाष को मारते पीटते हमारे कमरे में लाए। रफीक ने सुभाष से पूछताछ की। मैंने व रंजीत ने इसकी वीडियो बनाई थी, जो मोबाइल में है। मोबाइल सीबीआई के पास है। हम सुभाष से पूछताछ कर रहे थे कि कांस्टेबल मुकेश हमारे पास आया है और बोला कि सूरज बेहोश हो गया है। आप सब को एसएचओ नीचे बुला रहे हैं। उसे इलाज के लिए कोटखाई ले जाना है। रंजीव व रफीक सूरज को कोटखाई ले गए। मुङो सुभाष की निगरानी के लिए रखा। रात 1 बजे रंजीत वापस मेरे कमरे में आया और कहा कि सूरज को डाक्टर ने मृत घोषित कर दिया।

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Web Title: viral letter bombs on probe by central probe agency

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