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अमृतसर: मजीठा रोड पर स्थित ईएसआई अस्पताल में एक साथ दो भ्रूण मिले हैं। इनकी आयु 3 से 4 माह की बीच बताई जा रही है। लेकिन अस्पताल प्रबंधन मामले को छुपाने की पूरी कोशिश कर रहा है। अस्पताल की मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉक्टर नरेंद्र कौर ऐसी किसी घटना अथवा वहां पर दो भ्रूणों के मिलने से इंकार कर रही हैं और कहती हैं कि वह सुबह से ही अस्पताल में रही और जैसा आप कह रहे हैं, वैसा कुछ नहीं हुआ है। आपको कुछ गलतफहमी हुई है। वहीं मजीठा रोड पुलिस थाना प्रभारी प्रेमपाल सिंह ने इस बात की पुष्टि की है कि ईएसआई अस्पताल से पुलिस को मांस के टुकड़े मिले हैं। अब भ्रूण हैं अथवा नहीं, यह कहना कठिन है। इन मास के लोथड़ों की पहचान के लिए पोस्टमार्टम करवाया जाएगा। अस्पताल में भी घटना की पूरी चर्चा है, बस मैडम डा. नरिंदर कौर को ही इस बात की जानकारी नहीं है। अब वह इस मामले को छुपाने की कोशिश क्यों कर रही हैं। जानकारी के मुताबिक मेडिकल ऑफिस के पास सटे ऑपरेशन थिएटर के समीप ही बनी स्लैब कोई मरीज बैठा हुआ था, तो उसे वहां से दुर्गंध आने लगी। उसने आस पास देखा तो कुछ पता नहीं चला। इस पर उसने अपने मोबाइल की टार्च जलाई और स्लैब के नीचे देखा तो वहां उसे लिफाफे में लिपटे दो भ्रूण दिखाई दिया। देखने में इन दोनों की उम्र 3-4 माह के करीब लग रही थी। इस पर उसने तुरंत अस्पताल कर्मियों को सूचित किया। सारी बात अस्पताल में जंगल की आग की भांति फैल गई।

दैनिक सवेरा के पास पुख्ता जानकारी है कि अस्पताल की मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डा. नरिंदर कौर भी घटनास्थल पर गई और वहां पर पुलिस भी आई थी। लेकिन डा. नरिंदर कौर इस मामले से इनकार क्यों कर रही हैं औ्र वह किसे बचाने की कोशिश कर रही हैं, यह समझ से परे है। अस्पताल में चर्चा है कि यह अस्पताल के ही किसी कर्मी का काम है। क्योंकि जहां पर यह दोनों भ्रूण मिंले हैं, वहां किसी बाहरी व्यक्ति का पहुंच पाना कठिन है। यह दोनों भ्रूण एक दो दिन पहले कोई अस्पताल की स्लैब के नीचे छोड़ गया था और क्योंकि इस जगह की सफाई करने वाले सफाई कर्मी के घर में शादी थी और 2 दिनों की छुट्टी पर था। इसलिए इस एरिया की सफाई नहीं हो सकी नहीं। तो यह पहले ही पता चल जाता कि यहां पर किसी ने दो भ्रूण फेंक दिए हैं। दोनों भ्रूणों को फेंकने में अस्पताल के ही किसी व्यक्ति का पूरा हाथ है, क्योंकि यदि किसी बाहरी व्यक्ति ने बाहर से आकर यहां पर भ्रूण फेंकने होते तो वह खुली ग्राउंड में थक जाता ना की जोखिम उठाकर अस्पताल के अंदर जाता और इन दोनों भ्रूणों को स्लैब के नीचे रख देता। इस संबंध में अस्पताल की मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डा. नरेंद्र कौर से संपर्क करने पर उन्होंने पहले तो कहा कि उन्हें ऐसी किसी घटना की जानकारी नहीं है, आप शाम को फोन करना। शाम को 6:00 बजे उन्हें फोन किया गया तो वह बोली कि उन्होंने पूरी छानबीन कर ली है, लेकिन उन्हें ऐसी किसी घटना के बारे में कुछ पता नहीं चला है। आपको किसी ने गलत सूचना दी है। फिर भी मामले की जांच के लिए एक कमेटी का गठन कर देंगी। वहीं दूसरी तरफ पुलिस इंस्पेक्टर प्रेम पाल सिंह का यह कहना कि ईएसआई अस्पताल से मांस के लोथड़े मिले हैं और इन्हें पोस्टमार्टम के लिए भेजा जाएगा कि आखिर यह क्या है? पुलिस का ऐसा कहना मामले को और भी संदिग्ध बना देता है कि डा. नरिंदर कौर इसे क्यों छिपा रही हैं। 
इस संबंध में सेहत मंत्री ब्रह्म महिंदरा को भी अवगत करवा दिया गया है। जबकि इस संबंध में विभाग की डायरैक्टर डा. जसपाल कौर के फोन नंबर 98720-22774 पर बार बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। जबकि इन अधिकारियों को समझना चाहिए कि वह जनता के सेवक हैं और जनता के दिए गए टैक्स से ही उन्हें वेतन मिलता है। जब जनता से ही संपर्क नहीं रखना है तो फिर नौकरी से त्याग पत्र दे दें।

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Web Title: two embryos found in esi hospital medical superintendent of hospital refused

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