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लंदन: पंजाब की आखिरी सिख रानी महारानी जिंदां कौर के संग्रह से सोने की एक जोड़ी कान की बालियों इस्लामी और भारतीय बिक्री के हिस्से के तौर पर ब्रिटेन में नीलाम किया गए। महाराजा रंजीत सिंह की छोटी पत्नी की ये बालियां बॉनहम्स में नीलामी के लिए रखी गई थी, जहां पर यह 1 लाख 75 हजार पौंड (करीब 1.6 करोड़ रुपए) में बिके हैं।

जिंदां कौर, रंजीत सिंह की एकमात्र ऐसी पत्नी थीं, जिन्होंने उनकी मौत पर खुद को सती प्रथा के हवाले नहीं किया था। अंग्रेजों द्वारा कब्जा किए जाने से पहले राज युग के दौरान वह पंजाब की शासक बनीं थीं। कई सालों बाद उनके इंगलैंड जाने के दौरान उनके आभूषण उन्हें सौंप दिए गए थे। बॉनहम्स के इस्लामी और भारतीय कला के प्रमुख ओलिवर व्हाइट ने कहा कि ये सोने की बालियां अपने आप में बहुत खूबसूरत हैं।

1843 में जिंद कौर के पांच वर्षीय बेटे दलीप सिंह को नया राजा और उन्हें राज्य की संरक्षक घोषित किया गया। इसके बाद ब्रिटिश सरकार ने पंजाब को अपने कब्जे में ले लिया और रानी जिंद कौर को उनके बेटे से अलग कर बंदी बना लिया। इसी दौरान कोहिनूर हीरे के साथ रानी के आभूषण भी ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया को तोहफे के तौर पर सौंप दिए गए। 1861 में जब रानी जिंद कौर इंग्लैंड आईं तो झुमके सहित अन्य आभूषण उन्हें लौटा दिए गए। 1863 में उनका निधन हो गया था।

 

 

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Web Title: the last sikh queens earrings auctioned in britain

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