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चंडीगढ़: मोटर एक्सीडैंट क्लेम के मामले में हाईकोर्ट ने एक याचिका पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि अगर दुर्घटना किसी मांगे गए वाहन से हुई तो बीमा कंपनी उसके मुआवजे के लिए जिम्मेदार नहीं है, क्योंकि वाहन का पर्सनल एक्सीडैंट का बीमा था। इस स्थिति में बीमा सिर्फ वाहन चालक का ही है। ऐसे में बीमा कम्पनी सिर्फ वाहन के मालिक को ही मुआवजा दिए जाने के लिए जिम्मेदार है। 

गौरतलब है कि नारनौल के योगेंद्र ने हरिंदर सिंह से किसी काम के लिए बाइक मांगी थी और बाइक लेकर योगेंद्र अपने साथ नरेश नामक एक अन्य व्यक्ति को भी ले गया। जाते समय एक पशु से वाहन की दुर्घटना हो गई थी, जिसमें योगेंद्र की मौत हो गई थी। इस एक्सीडैंट के बाद योगेंद्र के परिजनों ने मोटर एक्सीडैंट क्लेम ट्रिब्यूनल में मुआवजे के लिए याचिका दायर की थी जिसे ट्रिब्यूनल ने खारिज कर दिया था और नो फाल्ट करार देते हुए उसके परिजनों को 50 हजार मुआवजा दिए जाने का फैसला सुना दिया था।

ट्रिब्यूनल के इसी फैसले के खिलाफ परिजनों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस ट्रिब्यूनल के फैसले को चुनौती दे दी थी और मुआवजे की राशि को बढ़ाए जाने की मांग की थी। इस अपील पर हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि वाहन का पर्सनल एक्सीडैंट का बीमा कवर था। ऐसे में बीमा कम्पनी सिर्फ वाहन के मालिक के साथ होने वाली दुर्घटना पर ही मुआवजा जारी कर सकती है। अगर कोई अन्य व्यक्ति उस वाहन को मालिक से मांग कर ले जाता है, फिर चाहे उसके पास वैध लाइसैंस ही क्यों न हो वह व्यक्ति उस वाहन का मालिक या ड्राइवर की परिभाषा में नहीं माना जा सकता है।  

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Web Title: the insurer is not responsible for the compensation due to an accident from a vehicle

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