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लुधियाना: प्रतिबंधित प्लास्टिक डोर बेचने वालों पर पुलिस ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। पहले पुलिस इस मामले में सिर्फ गैर जमानती धारा के तहत कार्रवाई करती थी, फिर पुलिस ने प्लास्टिक डोर पकड़े जाने पर धोखाधड़ी के तहत मामला दर्ज करना शुरू कर दिया लेकिन अब पुलिस ने ऐसे मामलों में दर्ज एफ.आई.आर. में धोखाधड़ी के साथ-साथ नेशल एन्वायरनमैंट प्रोटैक्शन एक्ट की धारा भी जोड़ दी है। बुधवार को बूटे शाह मंडी में पकड़े गए प्लास्टिक डोर के जखीरे के मामले में पुलिस ने पतंग विक्रेता सुरेश कुमार के मामले में धोखाधड़ी के साथ-साथ इसी एक्ट के तहत कार्रवाई की है। लुधियाना में ये पहला मामला है, जब पुलिस ने इस एक्ट के तहत कार्रवाई की है। इससे पहले दिल्ली में प्रतिबंधित डोर पकड़े जाने पर इस एक्ट के तहत कार्रवाई की जाती थी। उधर, दूसरी तरफ थाना शिमलापुरी व डाबा की पुलिस ने भी प्लास्टिक डोर बेचते 2 लोगों को काबू किया है। 

 


जानकारी के मुताबिक बुधवार रात को थाना कोतवाली के इंचार्ज एवं पी.पी.एस. (ट्रेनी) राजन शर्मा ने बूटे शाह मंडी में सुरेश कुमार की दुकान पर छापामारी की और वहां गोदाम में रखी प्लास्टिक डोर की 10 पेटियां बरामद की। इसमें 500 के करीब प्लास्टिक डोर की चरखियां थीं। नेशल एन्वायरनमैंट प्रोटैक्शन एक्ट 1986 के तहत सजा व जुर्माना : नेशल एन्वायरनमैंट प्रोटैक्शन एक्ट 1986 के तहत दोषी पाए जाने पर 5 साल की सजा और एक लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है। कानूनविंदों की बात करें तो उनका कहना है कि इस धारा के तहत जमानत में भी देरी हो सकती है। 

मुरादाबाद व बरेली में प्लास्टिक डोर से हुई 2 मौतों के बाद दाखिल हुई याचिका : प्लास्टिक डोर की पाबंदी की याचिका मुरादाबार व बरेली में इस डोर की चपेट में आकर खत्म हुई दो जिंदगियों से शुरू हुई। इन लोगों के परिवार वालों ने इसकी पाबंदी के लिए माननीय सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। इस पर साल 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में इन्हें फोरम के पास याचिका दाखिल करने के निर्देश दिए, जिस पर नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के चेयरमैन एवं माननीय न्यायाधीश जस्टिस स्वतंत्र कुमार, जस्टिस रघुविंदर सिंह राठौर व विक्रम सिंह साजवान पर आधारित बैंच ने सुनवाई शुरू की। इसके तहत सभी केंद्र प्रशासित प्रदेशों व राज्यों को इस चाइनीज डोर (प्लास्टिक मांझा) पर अपना ज्वाब दाखिल करने के लिए कहा गया। 

 

एन.जी.टी. ने भी कहा- प्रतिबंध के बावजूद दिल्ली, लुधियाना व बैंगलूर में बिक रही है डोर : इस प्लास्टिक डोर पर पहले ही प्रतिबंध लग चुका था। एन.जी.टीय ने भी मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से लिखा है कि ये प्रतिबंधित डोर, लुधियाना, दिल्ली और बैंगलूर की मार्कीट में सबसे ज्यादा बिक रही है। हर साल इससे हजारों पक्षी और पशु प्रभावित होते हैं, यही नहीं मानवीय जीवन भी इससे प्रभावित हो रहा है।पंजाब ने ट्रिब्यूनल में दाखिल किया हल्फनामा : ट्रिब्यूनल ने इसके लिए राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों से प्रतिबंधित डोर के बारे में ज्वाब मांगा था, जिस पर दिसंबर 2016 में पंजाब की तरफ से पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के सचिव ने ज्वाब दाखिल किया कि पंजाब में इस प्रतिबंधित डोर समेत पकड़े जाने पर धारा 144 के तहत कार्रवाई होती है लेकिन फोरम इस ज्वाब से संतुष्ट नहीं था। उन्होंन कहा कि ये ज्वाब तर्क संगत नहीं है। इससे वन्य जीवों के साथ-साथ पर्यावरण को भी खतरा है, इसलिए इस पर सख्त कार्रवाई की 
जानी चाहिए। 

लैब टैस्ट में भी प्र्यावरण के लिए खतरा साबित हुई प्लास्टिक डोर : इसके लिए फोरम ने हर पहलू पर जांच की। प्लास्टिक डोर कंपनी का भी तर्क लिया गया और परंपरागत मांझा वालों से भी उनका ज्वाब लिया गया। इसके बाद पतंग उड़ाने में इस्तेमाल आने वाले इन दोनों धागों का लैब टैस्ट भी कराया गया। इसमें भी ये प्लास्टिक डोर खरी नहीं उतरी, जिस पर बैंच ने इसे पूरी तरह प्रतिबंधित करने का आदेश दिए। 
 इन धाराओं के तहत हो सकती है कार्रवाई : अपने निर्देशों में फोरम की तरफ से स्पष्ट किया गया है कि प्लास्टिक डोर बेचने और इसका इस्तेमाल करने वालों पर एन्वायरनमैंट प्रोटैक्शन एक्ट1986 के साथ-साथ प्रीवैंशन ऑफ क्रूटली ऑफ एनीमल एक्ट 1960 और वाइल्ड लाइफ प्रोटैक्श्न एक्ट 1972 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। 

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Web Title: selling the murderers door can be caught then the sentence of 5 years and one lakh rupees fine

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