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सभी जानते हैं कि हर महीने एकादशी का व्रत रखा जाता है ताकि भगवान विष्णु की कृपा सदा हम पर बनी रहे और घर के सभी कष्ट भी समाप्त हो। बता दे कि आज नए साल के पहले दिन पौष मास के कृष्णपक्ष की एकादशी है जिसमें सभी व्रत रख कर कई कष्टों से निजात पा सकते हैं। इस एकादशी का नाम है सफला एकादशी। कहते हैं कि इस एकादशी का व्रत सच्चे मन और भक्ति से करने श्रीकृष्ण की कृपादृष्टि हम पर बनी रहती है। आइए जानते हैं कि कैसे करें ये व्रत और पूजा पाठ-

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पौराणिक कथा-
चम्पावती नगर का राजा महिष्मत था। उसके पांच पुत्र थे। महिष्मत का बड़ा बेटा लुम्भक हमेशा बुरे कामों में लगा रहता था। उसकी इस प्रकार की हरकतें देख महिष्मत ने उसे अपने राज्य से बाहर निकाल दिया। लुम्भक वन में चला गया और चोरी करने लगा। एक दिन जब वह रात में चोरी करने के लिए नगर में आया तो सिपाहियों ने उसे पकड़ लिया किन्तु जब उसने अपने को राजा महिष्मत का पुत्र बतलाया तो सिपाहियों ने उसे छोड़ दिया। फिर वह वन में लौट आया और वृक्षों के फल खाकर जीवन निर्वाह करने लगा। वह एक पुराने पीपल के वृक्ष के नीचे रहता था। एक बार अंजाने में ही उसने पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत कर लिया। उसने पौष मास में कृष्णपक्ष की दशमी के दिन वृक्षों के फल खाये और वस्त्रहीन होने के कारण रातभर जाड़े का कष्ट भोगा। सूर्योदय होने पर भी उसको होश नहीं आया. एकादशी के दिन भी लुम्भक बेहोश पड़ा रहा। दोपहर होने पर उसे होश आया।

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उठकर वह वन में गया और बहुत से फल लेकर जब तक विश्राम स्थल पर लौटा, तब तक सूर्य अस्त हो चुका था। तब उसने पीपल के वृक्ष की जड़ में बहुत से फल निवेदन करते हुए कहा- इन फलों से लक्ष्मीपति भगवान विष्णु संतुष्ट हों। ऐसा कहकर लुम्भक रातभर सोया नहीं। इस प्रकार अनायास ही उसने सफला एकादशी व्रत का पालन कर लिया। उसी समय आकाशवाणी हुई -राजकुमार लुम्भक! सफला एकादशी व्रत के प्रभाव से तुम राज्य और पुत्र प्राप्त करोगे। आकाशवाणी के बाद लुम्भक का रूप दिव्य हो गया। तबसे उसकी उत्तम बुद्धि भगवान विष्णु के भजन में लग गयी। उसने पंद्रह वर्षों तक सफलतापूर्वक राज्य का संचालन किया। उसको मनोज्ञ नामक पुत्र उत्पन्न हुआ। जब वह बड़ा हुआ तो लुम्भक ने राज्य अपने पुत्र को सौंप दिया और वह स्वयं भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में रम गया। अंत में सफला एकादशी के व्रत के प्रभाव से उसने विष्णुलोक को प्राप्त किया।

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Web Title: Safla Ekadashi 2019

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