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अमृतसर : बीबी जगदीश कौर (77) जिसके पति, पुत्र और 3 भाइयों को लगा दी थी, ने मुख्यारोपी सज्जन कुमार को ताउम्र के लिए जेल की सलाखों के पीछे जाने की सजा दिल्ली की हाईकोर्ट से करवाई है। 
जगदीश कौर ने बातचीत के दौरान 1984 के नरसंहार के बारे बताया कि वह पाकिस्तान के मुलतान क्षेत्र से 1947 के भारत-पाक विभाजन का दर्द सहती हुई भारत आई थी। उसके पिता स्वतंत्रता सेनानी और पति आजाद हिंद फौज में एक फौजी अधिकारी थे। उनका परिवार कांग्रेसी पृष्ठभूमि वाला है। इंदिरा गांधी के कत्ल के बाद सिखों का जब नरसंहार किया गया था तो किसी कांग्रेसी ने किसी सिख की न तो देशभक्ति देखी न ही कांग्रेस के प्रति वचनबद्धता।

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सिर्फ देखा कि जो सिख है उसको जिंदा जला दो। दरिंदों ने तो उनके कांग्रेसी परिवार होने के बावजूद नहीं बख्शा तो वह उनको क्यों बख्श देती। वह बताती हैं कि 1 नवंबर 1984 का दिन था। सुबह 9 बजे एक वकील उनके घर आया और उसने कहा कि कैंट क्षेत्र में सिख फौजियों का कत्ल किया जा रहा है। आंटी जी-अंकल और भाजी को बाहर बिलकुल न भेजना। कुछ समय बाद करीब 10 बजे उनके घर की पिछली गली से आवाजें आईं मारो, मारो सिखों को, मारो आंतकियों को, एक भी सिख जिंदा नहीं बचना चाहिए। कांग्रेस नेताओं के पास सिखों के घरों की सूचियां मौजूद हैं। उसकी 3 बेटियां, 1 छोटा बेटा था और बड़ा बेटा करीब 19 साल का था। उस वकील ने कहा कि छोटे बच्चों को पंडितों के  घर भेज दो। ढिल्लों को घर जल रहा है और अब आपकी बारी है। 

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जगदीश कौर के अनुसार उसने बच्चों को पंडितों के घर भेज दिया। इतनी देर में हमलावर उसके घर का दरवाजा तोड़कर भीतर आ गए। उनसे कहा कि इंदिरा गांधी हमारी भी प्रधानमंत्री थी और मेरे पिता स्वतंत्रता सेनानी थे। दरवाजे पर खड़े कांग्रेसी नेता ने कहा कि सिख बचेंगे तो डसेंगे। सिखों ने हमारी मां को मारा है। उन्होंने मेरे पति को ड्राइंग रूम में मार दिया और बेटे को आग लगा दी जो पानी-पानी पुकारता हुआ मेरे गोद में दम तोड़ गया। पुलिस के पास गई तो पुलिस ने कहा कि अभी और मरेंगे। तेरा बेटा मर गया तो क्या हो गया। शाम को 6 बजे पंडितों ने मेरे बाकी बच्चों को घर सें निकाल दिया। रोते हुए बच्चों को वह छत पर ले गई। वह कभी छोटे बेटे के पास बैठा करती और कभी अपने पति और पिता को कोसने लगती जो आजादी के लिए लड़े थे। कभी वह छत पर बच्चों के पास सहमी हुई जाती। मेरे भाई पड़ोस में थे जिस घर पर ताला जड़ा हुआ था, लेकिन हमलावर न टले और मेरे 3 भाइयों ने भागने का प्रयास किया, लेकिन तीनों को हमलावरों ने तेल डालकर उन पर आग लगा कर जला दिया। भागमल और गिरधारी समेत कई कांग्रेसियों के शोर मचाने पर ऐसा हुआ। 

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Web Title: My freedom fighter husband was not spared even by the poor!

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