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गणित के नाम से अक्सर छात्रों में डर की स्थिति देखने को मिलती है। इस प्रकार के हौव्वे के शिकार ऐसा नहीं कि भारतीय छात्र ही हैं बल्कि देश-विदेश में कमोबेश यही मनोदशा देखी जा सकती है। यही कारण है कि दसवीं के बाद बड़ी संख्या में युवा गणित के बदले अन्य वैकल्पिक विषयों का चुनाव कर आगे पढ़ाई करना पसंद करते हैं। अगर गौर से देखा जाए तो यह बिल्कुल स्पष्ट सा प्रतीत होता है कि गणित ही इकलौता ऐसा विषय है जिसमें शत-प्रतिशत अंक लाने से कुल प्राप्तांकों में छलांग संभव हो सकती है। तो इस बार बात करते हैं गणित के कुछ साधारण परंतु सरल टिप्स की जिनकी बदौलत अंकों में काफी इजाफा संभव हो सकता है। गणित विषय की पढ़ाई कभी भी पुस्तक पढ़ने के रूप में करने की भूल नहीं करनी चाहिए। नोटबुक में प्रश्नों के साथ उनका हल सही और निर्धारित स्टैप्स के अनुसार पूरी तरह से लिखकर ही करना चाहिए।

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अभ्यास करें : बोर्ड के एग्जाम में एनसीईआरटी की टैक्स्ट बुक्स से बाहर कुछ नहीं आता है। इसलिए गणित में भी प्रत्येक सॉल्व और अनसॉल्व प्रश्नों को अपने आप करने का अभ्यास अवश्य करें। पुनरावृति करते रहने से गलतियां कम होने के साथ दिए गए समय में संपूर्ण प्रश्नपत्र आत्मविश्वास के साथ हल किए जाने की संभावनाएं बढ़ती चली जाएंगी। अन्य विषयों की भांति गणित के विभिन्न अध्यायों के प्रश्नों के मान पहले से सी बीएसई द्वारा तय कर दिए जाते हैं। प्रत्येक खंड के मान के अनुसार समय का निर्धारण करें। 

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पकड़  बनाएं : अन्य विषयों की भांति गणित के विभिन्न अध्यायों के प्रश्नों के मान पहले से सीबीएसई द्वारा तय कर दिए जाते हैं। तैयारी करते समय प्रत्येक खंड के मान के अनुसार समय का निर्धारण करें। जाहिर है कि अधिक मान वाले खंडों पर पहले पकड़  बनाने का प्रयास करें। अब अंतिम समय में ऐसे अध्यायों से दूर रहना ही बेहतर होगा जो आपकी समझ से एकदम बाहर हैं। हालांकि संबंधित अध्यापक से मदद लेकर अंतिम प्रयास करने में कोई बुराई नहीं है। 

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टैक्स्ट बुक के बाद करे सैम्पल पेपर्स की शुरुआत : एनसीईआरटी की टैक्स्ट बुक्स को खत्म करने के बाद ही सैम्पल पेपर्स की शुरूआत करनी चाहिए। ईमानदारी से दो-तीन घंटे के समय में कई सैम्पल पेपर्स करना ज्यादा अंक पाने की अच्छी स्ट्रेटेजी साबित हो सकती है। अभ्यास एवं परीक्षा हॉल में भी गणित का रफ वर्क साथ-साथ उसी पृष्ठ पर हाशिया डालकर करना चाहिए। यह जान लीजिए कि परीक्षक की नजर इस रफ वर्क पर अवश्य जाती है। 

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सॉल्व करते समय सावधानी की जरूरत : गणित में महज सही उत्तर लिखने भर से पूरे अंक नहीं मिल जाते हैं। प्रश्न के हल में समस्त निर्धारित स्टैप्स का होना जरूरी है। इसमें आलस्य करने की कीमत आपको अंकों की कटौती के रूप में ङोलनी प़ड़ सकती है। प्रश्न लिखने, प्रत्येक स्टैप्स निर्धारित करने से लेकर अंतिम उत्तर लिखने तक प्लस(+), माइनस(-), दशमलव(.) और यूनिट्स के बारे में अतिरिक्त सतर्कता बरतें। 

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Web Title: Mathematics learning form formula

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