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जम्मू : कठुआ रेप व हत्याकांड में हर बीतते दिन के साथ कुछ इस तरह के खुलासे हो रहे हैं, जिनसे असमंजस की स्थिति और गहराती चली जा रही है। एक तरफ जहां रियासती सरकार में गतिरोध के बादल मंडराते हुए साफ दिख रहे हैं वहीं दूसरी तरफ क्राइम ब्रांच द्वारा अदालत में पेश किए गए चालान और की गई जांच पर सवालों का दायरा बढ़ता दिख रहा है। ताजा खुलासा आरोपियों के वकील असीम साहनी की वो पड़ताल है जिसमें उक्त अधिवक्ता का दावा है कि उसे कठुआ अस्पताल से पोस्टमार्टम की दो रिपोर्ट हासिल हुई और दोनों में ही बच्ची के साथ दुष्कर्म की कहीं पर भी कोई पुष्टि नहीं है। कठुआ कांड को इसके आरंभिक दौर में एक तरह से पंचायती हुक्का बना दिया गया था, जिसे सियासी मफाद के लिए खूब गुड़गुड़ाया गया। आठ बरस की मासूम के साथ सामूहिक बलात्कार ने न केवल प्रदेश सहित देश को झिझोंडा अलबत्ता अमरीका जैसे देश में भी विरोध प्रदर्शन हुए। अब जबकि पोस्टमार्टम की दो अलग-अलग रिपोर्ट पर सवाल खड़ा हुआ है और दोनों ही रिपोर्ट में विरोधाभास नजर आ रहा है तो ऐसे में जांच की विश्वसनियता पर प्रश्न चिन्ह सा लग चुका है। पहली रिपोर्ट में शरीर पर जख्मों के 6 निशानों सहित सिर पर किसी चोट के निशान न होने के दावा है तो दूसरी रिपोर्ट में हाइमन के फटने और जांघों पर खरोंचों की पुष्टि है। इसी तरह से मेरठ विश्वविद्यालय द्वारा आरोपी विशाल जंगोत्रा की मार्कशीट जारी होने के उपरांत सोशल मीडिया पर दिखी थी जिसमें उसे फेल बताया गया है क्योंकि जांच एजैंसी ने असली उत्तर पुस्तिकाएं कालेज से ले ली थी। विवि द्वारा जारी मार्कशीट भी एक बड़ा सवाल नुमायां कर रही है क्योंकि उस हिसाब से पेश किए गए चालान में क्राइम ब्रांच के उस दावे की सिरे से हवा निकल जाती है जिसमें कहा गया था कि आरोपी को बलात्कार के लिए बुलाया गया था। विदित हो कि इससे पहले भी कई बड़े खबरिया चैनलों ने उक्त देवस्थान की यथास्थिति को कैमरे में दिखाया है जहां पर बलात्कार के बाद बच्ची को जबरन छिपाने की बात चालान में दर्ज की गई थी। इस तरह के सवालों के बीच जांच रिपोर्ट पर संशय बना हुआ है और सी.बी.आई. जांच को लेकर जम्मू की मांग के न्यायोचित होने की एक तरह से पुष्टि हो रही है। 
 

रियासती सरकार में सब कुछ ठीक नहीं 
यह दूसरा पहलु है जिसे कठुआ रेप व हत्याकांड ने मौजूदा सरकार के अस्तित्व पर भी सवाल खड़ा कर दिया है। हालांकि भाजपा अपने दो मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाने और शेष मंत्रियों से पार्टी स्तर पर इस्तीफे लेने के बाद सब कुछ ठीक बता रही है लेकिन पी.डी.पी. में भी अब गहरा रोष पनपता नजर आ रहा है। उच्च दर्जे के विश्वसनीय सूत्र बता रहे हैं कि पी.डी.पी. की अभीहाल हुई एक बैठक में तसद्दुक मुफ्ती के उस बयान पर पार्टी के कई मंत्री नराज नजर आ रहे हैं जिसमें उन्होंने दोनों ही दलों को जुर्म में बराबर का भागीदार बताया था। ऐसे भी कयास सुनने को आ रहे हैं कि उक्त बैठक में कई आला मंत्रियों ने अपराध जैसे शब्द के साथ हुई टिपण्णी पर इस्तीफे देने की बात तक कह डाली थी। भाजपा भले ही किसी भी कीमत पर सरकार में बने रहना चाहती है लेकिन जिस तरह से पी.डी.पी. ने इस भगवे दल के साथ गठजोड़ के बाद अपने जनाधार को कश्मीर में गंवाया है उस पर डैमेज कंट्रोल को लेकर शायद ऐसा कोई कड़ा फैसला पार्टी ले ले तो हैरत की बात नहीं होगी। भाजपा के तमाम मंत्री अब सचिवालय जाने से परहेज कर रहे हैं और बीते दिन स्वस्थ मंत्री द्वारा राजौरी में अपने विभाग के कई कर्मचारियों के मौके पर गैरहाजिर होने के बाद निलंबन के आदेश पर भी विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं। यद्यपि कायदे से अगर देखा जाए तो इस्तीफे पार्टी को दिए गए हैं ना कि मुख्यमंत्री को। ऐसे में अस्थिरता की स्थिति फिर भी साफ दिख रही है। 

 

मासूम के नाम पर चंदा उगाहने का खेल 
यह इस दुखद: हत्याकांड का सबसे शर्मनाक पहलु है। बीते दिन गुज्जर नेता नजाकत खटाना ने दूसरे गुज्जर नेता तालिब हुसैन पर सीधा आरोप दागा कि बच्ची को इंसाफ दिलवाने के नाम पर करोड़ों में चंदा बटोरा गया है और तालिब हुसैन ने वो सारा पैसा खुद ही हजम कर लिया है। खटाना ने यह भी आरोप लगाया कि कल तक उस शख्स के पास खाने तक के लाले थे पर उसे कश्मीर बुलाया गया था जहां से आने के बाद उसने निरंतर दिल्ली तक हवाई जहाज में कई बार सफर किया और देश तथा विदेशों से भेजे जा रहे पैसे का गबन किया है। हालांकि तालिब हुसैन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है लेकिन बच्ची को इंसाफ दिलवाने का दम भरने वाले खुद खानाबदोशों के नेता ही एक दूसरे पर गंभीर आरोप आयद कर रहे हैं। इससे मामले में उगाहे जाने वाले चंदे को लेकर हेराफेरी की बात सामने आ रही है जिस पर अब जांच एजैंसियों ने खटाना से विस्तृत बात भी की है। आने वाले दिनों में हालात कैसे होते हैं यह तो अभी कहना मुहाल है पर यह तय है कि बच्ची को इंसाफ दिलवाने के नाम पर काफी बड़ी धनराशि एकत्रित जरूर हुई है। अब वो पैसा किसके पास है यह अभी तय नहीं है। 

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Web Title: investigation of crime branch in jad

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