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 भारत की अवधारणा आध्यात्म आधारित अवधारणा है। भारतीय दृष्टि में आध्यात्म और एकात्म का समावेश है। भारतीय संस्कारों में सामाजिक परोपकार समाहित हैं। भारत के युवा वर्ग को भारत को सही मायने में समझने की जरूरत है। यह बात प्रतिष्ठित चिंतक एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सहकार्यवाह डा. मनमोहन वैद्य ने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में युवा एवं भारत विषय पर विशेष व्याख्यान देते हुए कही। इस विशेष व्याख्यान का आयोजन एमडीयू के चौ. रणबीर सिंह इंस्टीटय़ूट ऑफ सोशल एण्ड इकानोमिक चेंज, एमडीयू शैक्षिक संघ एवं विश्व संवाद केन्द्र, रोहतक के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। डा. मनमोहन वैद्य ने कहा कि भारत का भविष्य युवाओं के हाथ में है। भारत की सांस्कृतिक विविधता, विविधता में एकता, सांस्कृतिक विशिष्टता का पूरी दुनिया में कोई सानी नहीं। उन्होंने कहा कि युवा वर्ग दीप स्तंभ बनकर पूरे विश्व में भारत के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक वैशिष्ट्य को प्रचारित-प्रसारित करें। उन्होंने कहा कि धर्म की अवधारणा बहुत की व्यापक है। उन्होंने धर्म को जीवन एवं समाज का आधार बताया। साथ ही कहा कि भारत में धर्म की अवधारणा में सामाजिक परोपकारों समेत मनुष्य-प्रकृति समन्वय तथा समूची सृष्टि के कल्याण का संदेश निहित है।  कुलपति प्रो. बिजेन्द्र कुमार पुनिया ने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि भारत का गौरवशाली इतिहास रहा है। भारतीय प्राचीन संस्कृति समृद्ध संस्कृति रही है। युवा वर्ग को भारत के इतिहास एवं संस्कृति से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान कुलपति प्रो.पुनिया ने किया। इस अवसर पर मडूटा के अध्यक्ष प्रो. नेतराम गर्ग, विश्व संवाद केन्द्र, हरियाणा के सह-सचिव डा. विवेक सिंह, सीबीएलयू, भिवानी के कुलपति प्रो. आरके मित्तल, एमडीयू रजिस्ट्रार जितेन्द्र भारद्वाज, वाईएमसीए, फरीदाबाद के कुलसचिव डा. संजय कुमार, डा. ओम प्रभात अग्रवाल, सीता राम व्यास, सुभाष आहूजा, विजय कुमार, समेत एमडीयू के प्राध्यापकगण, शोधार्थी, विद्यार्थी, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा अन्य गणमान्य जन उपस्थित रहे। 

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Web Title: indias future in the hands of the youth dr manmohan vaidya

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