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बगदादः साल 2014 में इराक से अगवा किए गए 39 भारतीयों को भारत सरकार द्वारा मृत घोषित किए जाने के बाद इन युवकों के परिवार इस दुख भरी खबर से उबरने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार द्वारा अचानक किए गए इस ऐलान से परिवार अभी भी सन्न हैं और कई सवाल उनके मन में जस के तस बने हुए है। इन सवालों में सरकार के प्रति उनका गुस्सा साफ नजर आ रहा है। इस परिवारों का सवाल है कि आखिर केंद्र ने इन वर्षों में उन्हें अंधेरे में क्यों रखा? वहीं कई परिजन सरकार से उन्हें डीएनए रिपोर्ट्स दिखाने की मांग कर रहे हैं।

बता दें कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने मंगलवार को संसद को सूचित किया कि आईएसआईएस द्वारा अपहृत 39 लोग मारे जा चुके हैं। इसके बाद पंजाब में पीड़ित परिवारों के घरों के सामने दिल दहला देने वाला दृश्य देखने को मिला। मारे गए कामगारों के कई रिश्तेदारों ने कहा कि अधिकारियों ने उन्हें उनके प्रियजन के मारे जाने के बारे में आधिकारिक तौर पर सूचित नहीं किया था। अपने 27 वर्षीय भाई मंजिंदर को खो चुकी गुरपिंदर कौर बेहद उदास है। बेहद गमग़ीन आवाज़ में वह कहती हैं, 'शुरुआत में वे कह रहे थे सभी भारतीय जिंदा है। अब मंत्री ने आज यह बयान दिया। हमें तो इसकी पहले कोई जानकारी भी नहीं दी गई। हमें टीवी से इसका पता चला.' वह कहती हैं, 'हम सरकार से मांग करते हैं कि वे हमें डीएनए रिपोर्ट्स मुहैया कराएं।'

वहीं मारे गए लोगों में शामिल 31 वर्षीय निशान के भाई सरवन ने निराशा के साथ कहा अब हम क्या कहें? अमृतसर के रहने वाले सरवन ने दावा किया, ‘सरकार ने इन सालों में हमें अंधेरे में रखा।’ उन्होंने कहा कि अब चार साल बाद वे इस तरह का स्तब्ध करने वाला बयान दे रहे हैं। सरवन ने कहा, ‘हमने केंद्रीय मंत्री (सुषमा स्वराज) से 11 से 12 बार मुलाकात की और हमें बताया गया कि उनके सूत्रों के मुताबिक लापता भारतीय जीवित हैं। वे कहते रहे हैं कि हरजीत मसीह (आईएस के चंगुल से भाग निकलने में कामयाब इकलौता भारतीय) झूठा है. अगर उनके सूत्र यह बताते रहे हैं कि वे जिंदा हैं तो अचानक अब क्या हुआ। सरकार को झूठे बयान देने की बजाय यह कहना चाहिए था कि उनके पास लापता भारतीयों के बारे में कोई जानकारी नहीं है।’ 

चार साल से दफन थे 39 भारतीयों के शव 
अब इसके साफ सबूत मिल चुके हैं। चार साल से मोसुल में दफन भारतीयों के DNA अब इसी रेतीले मिट्टी से सैंपल लेकर परिवार वालों से मैच कर पता लगा कि चार साल पहले किस बेरहमी से IS के आतंकियों ने उनका कत्ल किया है। मंगलवार को इराक़ी प्रशासन ने इस बात की पुष्टि कर दी कि पिछले साल जो शव एक सामूहिक कब्र में मिले थे वो उन्हीं भारतीय मज़दूरों के थे, जिन्हें 2014 में आइसिस ने मोसुल में बंधक बनाया था। ये शव मोसुल के उत्तर-पश्चिम में बादोश गांव के नज़दीक दफ़्न पाए गए। ये वही इलाका है, जिस पर पिछले साल जुलाई में इराकी बलों ने अपना क़ब्ज़ा जमाया था। इराक़ के शहीद संस्थान के प्रमुख ने इस बात की तस्दीक की कि 39 शवों में 38 की पहचान हो गई है।
 

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Web Title: families of indians killed in iraq raise questions on indian govt

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