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नई दिल्लीः पूर्व वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के चौथे बजट को ‘‘जुमलों की सुनामी’’ करार देते हुये इसमें किये गये रोजगार के दावे, किसानों को उनकी उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य एमएसपी को डेढ़ गुना करने और स्वास्थ्य बीमा योजना को दुनिया के तीन सबसे बड़े जुमले बताया।

राज्यसभा में आज बजट पर चर्चा के दौरान सत्तापक्ष के सदस्यों के भारी शोरशराबे के बीच चिदंबरम ने सरकार पर बीते चार सालों से सिर्फ जुमलों की बारिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि धरातल पर कोई ठोस काम नहीं होने के कारण अर्थव्यवस्था की हालत उस गंभीर मरीज की तरह हो गयी है, जिसका डाक्टरर् मुख्य आर्थिक सलाहकारी तो अच्छा है लेकिन मरीज की देखभाल कर रही सरकार, डाक्टर की सलाह पर अमल करने को कतई तैयार नहीं है।

चिदंबरम ने बजट की घोषणाओं और अर्थव्यवस्था के बारे में किये गये दावों को हकीकत से दूर बताते हुये कहा कि सरकार के आधारहीन दावों के कारण ही राजकोषीय घाटा अब के शीर्ष स्तर पर और विकास दर न्यूनतम स्तर पर आ गयी है। उन्होंने अर्थव्यवस्था की नाजुक हालत का हवाला देते हुये वित्त मंत्री से दर्जन भर सवाल पूछे। उन्होंने आर्थिक समीक्षा में वित्तीय वर्ष 2018-19 में वित्तीय घाटे को अब तक की सबसे खराब स्थिति में बताते हुये इसके 3.4 प्रतिशत के स्तर पर रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है। चिदंबरम ने कहा कि बजट में वित्तीय घाटे और मंहगाई को काबू में करने का कोई जिक्र नहीं है।


इससे पहले राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के जवाब में प्रधानमंत्री के भाषण के दौरान विपक्ष के हंगामे का विरोध कर रहे सत्तापक्ष के सदस्यों ने आज भोजनावकाश के बाद सदन की कार्यवाही शुरु होते ही नारेबाजी शुरु कर दी। भाजपा सदस्य इसे प्रधानमंत्री का अपमान बताते हुये कांग्रेस से इसके लिये देश और प्रधानमंत्री से माफी मांगने की मांग कर रहे थे।

सत्तापक्ष की नारेबाजी के बीच चिदंबरम ने लगभग 40 मिनट के अपने भाषण में सरकार की आर्थिक नीतियों को देश की जनता के साथ धोखा बताते हुये भविष्य में इसके गंभीर प्रभावों की ओर आगाह किया। उन्होंने सरकार पर आंकड़ों को छुपाने का आरोप लगाते हुये कहा कि पिछले चार सालों में आर्थिक वित्तीय घाटा बढ़ने की दर 3.2 से 3.5 प्रतिशत होने के बाद सरकार की देनदारियां बढ़कर 85 हजार करोड़ रुपये पर पहुंच गयी। उन्होंने सरकार से पूछा कि यह बात बजट से नदारद क्यों है।

चिदंबरम ने प्रति वर्ष दो करोड़ रोजगार सृजन के मोदी सरकार के वादे का जिक्र करते हुये कहा कि अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठनर आईएलओ द्वारा नियत रोजगार की परिभाषा के तहत सेवाशर्तों और रोजगार सुरक्षा से युक्त समुचित नौकरी को शामिल किया गया है। उन्होंने सरकार से रोजगार की उसकी अपनी परिभाषा बताने और पिछले चार सालों में सृजित रोजगारों की संख्या का खुलासा करने की मांग करते हुये पूछा कि क्या सरकार आईएलओ को पकौड़ा बेचने को भी रोजगार की परिभाषा में शामिल करने का सुझाव देगी।

पूर्व वित्त मंत्री ने कर राजस्व पर सरकार की खामियों को उजागर करते हुये कहा कि सीमा शुल्क में इजाफे के बावजूद पिछले साल इसकी अनुमानित वसूली 2.45 लाख करोड़ रुपये के बजाय वास्तविक वसूली 1.35 लाख करोड़ रुपये ही रही। उन्होंने कहा कि इसका सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि सीमा शुल्क में बढ़ोतरी के बावजूद अगले साल इसकी अनुमानित वसूली 1.12 लाख करोड़ रुपये ही रखी गयी। इसी तरह उन्होने प्रत्यक्ष और परोक्ष करों के असंतुलन का भी मुद्दा उठाते हुये कहा कि सरकार अर्थव्यवस्था के लिये कर राजस्व में निगमित कर और आय कर जैसे प्रत्यक्ष करों की हिस्सेदारी को कम करने तथा जनता पर बोझ बढ़ाने वाले जीएसटी जैसे परोक्ष करों की हिस्सेदारी बढ़ाने को खतरनाक बताते हुये कहा कि इससे भविष्य में उद्योग जगत को लाभ और जनता की मुसीबत बढ़ेगी।

चिदंबरम ने वित्त मंत्री अरुण जेटली से इन सवालों के जवाब देने की अपेक्षा व्यक्त करते हुये सरकार के तीन जुमलों का जिक्र किया। उन्होंने किसानों को उपज का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य मुहैया कराने के सरकार के दावे को पहला जुमला बताते हुये कहा कि सरकार ने पिछले दो सालों में समर्थन मूल्य में सिर्फ पांच रुपये की बढ़ोतरी की। इसे किसानों के साथ धोखा बताते हुये उन्होंने कहा कि संप्रग सरकार के दस साल के कार्यकाल में समर्थन मूल्य में 100 प्रतिशत वृद्धि हुयी थी।

रोजगार सृजन के आंकड़ों को बजट में छुपाने का आरोप लगाते हुये चिदंबरम ने पिछले चार साल में सरकारी आंकड़ों में लगातार राजगार के अवसर बढ़ने का दावा किया गया है जबकि सकल घरेलू उत्पादर् जीडीपीी लगातार घट रहा है। इसे दूसरा जुमला बताते हुये उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का एकमात्र देश बन गया है जिसमें जीडीपी घटे और रोजगार बढ़ें। जबकि हास्यास्पद बात यह है कि अर्धसैन्य बलों से लेकर सरकारी महकमों तक सभी विभागों में लाखों पद खाली पड़े हैं। 

चिदंबरम ने बजट में घोषित चिकित्सा बीमा योजना को अब तक का सबसे बड़ा जुमला बताते हुये कहा कि 10 करोड़ परिवारों को पांच लाख रुपये के बीमा में शामिल करने पर 1.50 लाख करोड़ रुपये की प्रीमियम राशि का इंतजाम कहां से करेगी, इसका बजट में कोई उपाय नहीं बताया है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने बजट भाषण में इसके लिये अतिरिक्त स्रोतों से प्रीमियम राशि का इंतजाम करने की बात कही लेकिन यह नहीं बताया कि क्या ये अतिरिक्त स्रोत क्या हैं।

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Web Title: chidambaram questions 12 questions from the government

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