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सोरठि महला ५ ॥ विचि करता पुरखु खलोआ ॥ वालु न विंगा होआ ॥ मजनु गुर आंदा रासे ॥ जपि हरि हरि किलविख नासे ॥१॥ संतहु रामदास सरोवरु नीका ॥ जो नावै सो कुलु तरावै उधारु होआ है जी का ॥१॥ रहाउ ॥

(हे भाई!) साध सांगत में जिस मनुख का) आत्मिक इशनान गुरु ने सफल कर दिया, वेह मनुख सदा परमात्मा का नाम जप जप के (अपने सारे) पाप धो लेता है। सरब व्यापक करतार सवयं उसकी सहायता करता है, ( उस की आत्मिक-रस पूँजी का) जरा भी नुक्सान नहीं होता।१। हे संत जानो! साध सांगत (एक) सुंदर (स्थान) है। जो मनुख साध सांगत में आत्मिक इशनान करता है (मन को नाम-जल से पवित्र करता है), उस के जीवन का (विकारों से) पार उतारा हो जाता है, वेह अपनी सार कुल को भी (संसार-सागर से) पार ले जाता है।१।रहाउ।

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Web Title: Hukamnama shri harmandir sahib ji 11 जनवरी

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