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जम्मू-कश्मीरः देश भर में 15 अगस्त को मनाए जाने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियां जम्मू-कश्मीर में भी पूरे जोरों से चल रही हैं। मंगलवार को इस समारोह से पहले फुल ड्रेस रिहर्सल की गई इस दौरान देखा गया कि जिस ओपन जीप में सवार होकर राज्यपाल सत्यपाल मलिक सुरक्षा दलों से सलामी लेंगे उस जीप के एक तरफ राष्ट्रीय ध्वज लहराया जबकि जीप की बाईं और जम्मू-कश्मीर राज्य का झंड़ा आखरी बार लगाया गया है। जम्मू-कश्मीर में इस के स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर राज्य के प्रत्येक नागरिक में काफी उत्साह देखा जा रहा है।  इस मौके पर देश के सेना प्रमुख विपिन रावत ने राज्य के लोगों को भरोसा जताया कि भारतीय सेना सदैव उनके साथ है और उनकी सुरक्षा के लिए दिन रात तत्पर रहेगी। 

सुप्रीम कोर्ट ने रामलला विराजमान से जमीन पर कब्जे के सबूत पेश करने को कहा है। संविधान पीठ ने कहा कि आप सुन्नी वक्फ बोर्ड के दावे को नकार रहे हैं, आप अपने दावे को कैसे साबित करेंगे। जिसके बाद रामलला के वकील वैद्यनाथन ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के जजों के फैसले में वैचारिक तालमेल नहीं हैं। रामलला विराजमान देवता हैं, दूसरी जगह वो कहते हैं कि संपत्ति के मालिक हैं। जब स्थान खुद में पूजनीय है और देवता है, तो ये नहीं कहा जा सकता है कि वहां भगवान रहते हैं। ऐसे में इस पर सामूहिक कब्जा नहीं हो सकता है। 

इस पर रामलला के वकील वैद्यनाथन ने कहा कि ये हमारा नजरिया है, अगर कोई दूसरा पक्ष उसपर दावा करता है तो हम डील कर लेंगे। लेकिन हमारा मानना है कि स्थान देवता है और देवता का दो पक्षों में सामूहिक कब्जा नहीं दिया जा सकता। इस दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि आपका दुनिया देखने का नजरिया सिर्फ आपका नजरिया है लेकिन आपके देखने का तरीका सिर्फ एक मात्र नजरिया नहीं हो सकता है। उन्होंने आगे कहा कि एक नजरिया ये है कि स्थान खुद में ईश्वर है और दूसरा नजरिया ये है कि वहां पर हमें पूजा करने का हक मिलना चाहिए। हमें दोनों को देखना होगा।

रामलला के वकील वैद्यनाथन ने कहा कि ये ऐतिहासिक तथ्य है कि लोग बाहर से भारत आए थे और उन्होंने मंदिरों को तोड़ा था। इतिहास की कुछ रिपोर्ट्स में ये भी जिक्र किया जाता है कि ब्रिटिश काल में हिंदुओं को बाहर रखने के लिए एक दीवार बनाई गई थी। किसी भी रिपोर्ट में वहां पर नमाज किए जाने का जिक्र नहीं है। अगर हिंदुओं ने पूजा के लिए स्थल बनाया और उसे तोड़ने का आदेश हुआय़ लेकिन हमें इनकी जानकारी नहीं हैय़ मुसलमानों के द्वारा वहां पर नमाज़ किए जाने का तथ्य 1528 से 1855 तक नहीं है। हाईकोर्ट ने भी इस मामले का जिक्र किया है।

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Web Title: Independence Day preparations in Jammu and Kashmir in full swing, state flag will be seen for the last time

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